BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन जेपी गंगा पथ (Patna Marine Drive) अब और भी व्यवस्थित और खूबसूरत नजर आएगा। पटना नगर निगम ने सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से लगने वाले ठेला-खोमचा दुकानदारों को एक छत के नीचे लाने की तैयारी पूरी कर ली है। दीघा गोलंबर के नीचे एक आधुनिक वेंडिंग जोन विकसित किया जा रहा है, जिससे न केवल मरीन ड्राइव पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि दुकानदारों को भी बेहतर माहौल मिलेगा।
दीघा गोलंबर के पास 55 हजार वर्गफुट में शिफ्ट होंगी दुकानें
वर्तमान में जेपी गंगा पथ पर दुकानदार सड़क के किनारे धूल और असुरक्षित माहौल में अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। इसे देखते हुए नगर निगम ने अटल पथ से रेलवे क्रॉसिंग के बीच करीब 55 हजार वर्गफुट खाली जमीन पर वेंडिंग जोन बनाने का निर्णय लिया है।
इस प्रोजेक्ट के लिए दानापुर अंचलाधिकारी से एनओसी (NOC) मिल चुकी है, जिससे काम में तेजी आई है। इस जगह के विकसित होने से वेंडरों को धूल से मुक्ति मिलेगी और पर्यटकों को भी एक व्यवस्थित बाजार मिलेगा।
करोड़ों का बजट और 15 मई तक का लक्ष्य
नगर निगम ने इस पूरे वेंडिंग जोन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का लक्ष्य रखा है।
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बजट: वेंडिंग जोन में पेवर ब्लॉक बिछाने, ड्रेनेज सिस्टम और हाई मास्ट लाइट लगाने पर करीब 2.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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अस्थायी व्यवस्था: पहले चरण में 15 मई तक करीब 250 दुकानदारों को यहां बसाने का लक्ष्य है, जिसके लिए 59 लाख रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है।
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अगला चरण: दूसरे फेज में यहां फुट ओवरब्रिज, शौचालय, पार्किंग और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी। भविष्य में इसे एंटरटेनमेंट जोन और पार्क के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
अगस्त तक लगेंगी 50 आधुनिक ‘प्री-फैब’ दुकानें
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मरीन ड्राइव के किनारे अगस्त 2026 तक 50 अत्याधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड (Pre-fab) दुकानें लगाई जाएंगी।
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लागत: इस पूरी परियोजना पर करीब 7.18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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दुकानों का स्वरूप: इनमें 45 छोटी और 5 बड़ी दुकानें होंगी, जिन्हें 10-10 के पांच समूहों (क्लस्टर्स) में बांटा जाएगा।
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सुविधाएं: इन दुकानों में बिजली कनेक्शन, प्लंबिंग, ड्रेनेज और आकर्षक एलईडी लाइटिंग होगी। तीन साल तक इनके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी।
NGT के नियमों के कारण बदला गया प्रोजेक्ट
शुरुआत में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यहां 15.45 करोड़ रुपये की लागत से 500 दुकानें लगाने की योजना थी। इनमें से 200 से अधिक दुकानें लगा भी दी गई थीं। हालांकि, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की गाइडलाइन और डिजाइन संबंधी खामियों के कारण जनवरी 2026 में इन्हें हटाना पड़ा।
एनजीटी का निर्देश था कि गंगा तट पर ऐसा कोई स्थायी निर्माण न हो जो वहां की सुंदरता और दृश्य (View) को बाधित करे। अब नई डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि गंगा की खूबसूरती बरकरार रहे और पर्यावरण के नियमों का भी उल्लंघन न हो।
वेंडरों और पर्यटकों दोनों को होगा फायदा
इस नई व्यवस्था से पटना वासियों को मरीन ड्राइव पर घूमने का एक नया अनुभव मिलेगा।
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जाम से मुक्ति: सड़क किनारे ठेले हटने से ट्रैफिक स्मूथ होगा।
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हाइजीन और सफाई: व्यवस्थित ड्रेनेज और कूड़ेदान होने से गंगा तट पर गंदगी कम होगी।
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व्यवसाय में वृद्धि: धूल रहित और सुरक्षित माहौल मिलने से दुकानदारों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
पटना नगर निगम का यह कदम जेपी गंगा पथ को देश के बेहतरीन रिवरफ्रंट्स की श्रेणी में खड़ा कर देगा। 15 मई से शुरू होने वाली यह शिफ्टिंग प्रक्रिया पटना की सूरत बदलने वाली साबित होगी।