राघव चड्ढा का बड़ा धमाका, दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ थामेंगे BJP का दामन

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए 24 अप्रैल, 2026 का दिन किसी राजनीतिक भूकंप से कम नहीं रहा। लंबे समय से चल रही गुटबाजी और कलह ने आखिरकार पार्टी को तोड़ दिया है। पार्टी के युवा चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को औपचारिक घोषणा कर दी कि वे ‘आप’ को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो रहे हैं। यह महज एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं है, बल्कि राज्यसभा में पार्टी के वजूद को हिला देने वाली बगावत है।

कानूनी दांव: दो-तिहाई सदस्यों के साथ विलय की तैयारी

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे दिग्गज नेता भी नजर आए। चड्ढा ने साफ किया कि यह कोई साधारण इस्तीफा नहीं है, बल्कि एक तकनीकी ‘मर्जर’ (विलय) है।

उन्होंने कहा, “हमने निर्णय लिया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सदस्य होने के नाते, हम भारत के संविधान के प्रावधानों का पालन करते हुए खुद का भाजपा में विलय करेंगे।”

इसका क्या मतलब है? भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती। राघव चड्ढा इसी कानूनी कवच का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनकी और अन्य सांसदों की राज्यसभा सदस्यता सुरक्षित रहे।

महीनों से जारी था तनाव: क्यों टूटी पार्टी?

अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच संबंधों में खटास की खबरें महीनों से सुर्खियों में थीं। पंजाब से राज्यसभा सांसद चड्ढा, जो कभी केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे, पिछले कुछ समय से पार्टी की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट चल रहे थे।

जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और नेतृत्व के मुद्दों को लेकर उपजा यह असंतोष अब इस बड़े विद्रोह के रूप में सामने आया है। चड्ढा ने संकेत दिया कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक नई राजनीतिक दिशा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

राज्यसभा का गणित: अब AAP के पास क्या बचेगा?

फिलहाल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य हैं। राघव चड्ढा के दावे के अनुसार, अगर दो-तिहाई (यानी 7 या उससे ज्यादा) सांसद भाजपा में शामिल होते हैं, तो उच्च सदन में केजरीवाल की पार्टी का कद बहुत छोटा रह जाएगा।

AAP के मौजूदा 10 राज्यसभा सदस्यों की सूची:

  1. राघव चड्ढा

  2. संजय सिंह

  3. स्वाति मालीवाल

  4. हरभजन सिंह

  5. राजिंदर गुप्ता

  6. विक्रमजीत साहनी

  7. नारायण दास गुप्ता

  8. अशोक कुमार मित्तल

  9. संदीप पाठक

  10. संत बलबीर सिंह

यदि चड्ढा का दावा सही साबित होता है, तो अरविंद केजरीवाल के पास केवल 2 या 3 सांसद ही बचेंगे, जो राष्ट्रीय राजनीति में उनकी ताकत को काफी हद तक कम कर देगा।

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