बिहार: समय से पहले क्यों जलने लगा प्रदेश? जानिए इस भीषण गर्मी की असली वजह और बचाव के उपाय

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में इस साल मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। अभी तो वसंत की विदाई का समय था, लेकिन मार्च-अप्रैल में ही पारा 40°C के पार पहुँच गया है। गया, भागलपुर और मुंगेर जैसे जिलों में तापमान 43°C से 44°C तक दर्ज किया जा रहा है। यह केवल सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि एक ‘क्लाइमेट इमरजेंसी’ है। आखिर क्यों बिहार समय से पहले भट्टी की तरह तपने लगा है? आइए समझते हैं इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण और सरकार की तैयारी।

बिहार को ‘भट्टी’ बनाने वाले 3 मुख्य विलेन

मौसम वैज्ञानिकों ने इस अस्वाभाविक गर्मी के पीछे तीन प्रमुख कारणों की पहचान की है:

  • अल-नीनो (El-Nino): प्रशांत महासागर में होने वाली इस घटना के कारण समुद्री तापमान बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के मानसून और गर्मी पर पड़ता है, जिससे ज़मीन सामान्य से कहीं ज़्यादा तप रही है।

  • सर्दियों की बारिश का न होना: इस साल उत्तर भारत में ‘पश्चिमी विक्षोभ’ काफी कमज़ोर रहा। बिहार में जनवरी और फरवरी में सामान्य से 99% कम बारिश हुई। मिट्टी की नमी खत्म होने से सूरज की किरणें ज़मीन को सीधे गर्म कर रही हैं।

  • हीट डोम (Heat Dome): बिहार के ऊपर हवा के दबाव का एक ऐसा घेरा बन गया है जो गर्म हवा को बाहर नहीं निकलने दे रहा। यह गर्म हवा को नीचे की ओर दबाता है, जिससे तापमान और बढ़ जाता है।

सूखती गंगा और बढ़ता तापमान

बिहार की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी का सूखना भी गर्मी बढ़ा रहा है। ताज़ा शोध के अनुसार, गंगा बेसिन पिछले 1,300 वर्षों के सबसे खराब सूखे से गुजर रहा है।

  • नदी में पानी कम होने से वाष्पीकरण (Evaporation) के जरिए मिलने वाली ठंडक खत्म हो गई है।

  • नदी के किनारे की सूखी रेत दिन भर गर्मी सोखती है और रात में उसे छोड़ती है, जिससे पटना जैसे शहरों में रातें भी बेहद गर्म हो गई हैं।

कंक्रीट का जंगल: 84% हरियाली खत्म

एक समय बाग-बगीचों के लिए मशहूर पटना अब कंक्रीट का ढेर बन चुका है। सैटेलाइट डेटा बताते हैं कि पटना में हरित आवरण (Green Cover) में 84% की गिरावट आई है। डामर की सड़कें और कंक्रीट के मकान दिन भर गर्मी सोखते हैं, जिससे शहरों का तापमान गांवों की तुलना में 1.2°C तक ज़्यादा रहता है।

खेती और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा

यह भीषण गर्मी न केवल इंसान बल्कि अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुँचा रही है:

  • फसलों की बर्बादी: गेहूं की फसल दाना भरने से पहले ही सूख रही है, जिससे पैदावार 15-20% तक गिर सकती है। आम और लीची के मंजर भी झड़ रहे हैं।

  • गर्भवती महिलाओं को खतरा: एक अध्ययन के अनुसार, 35°C से अधिक तापमान में रहने से गर्भवती महिलाओं और गर्भ में पल रहे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

सरकार की तैयारी: स्कूलों का समय बदला और बीमा योजना

प्रशासन इस ‘अदृश्य आपदा’ से लड़ने के लिए कई कदम उठा रहा है:

  • स्कूलों का समय: पटना सहित कई जिलों में कक्षा 5 तक के स्कूल सुबह 11:30 बजे तक बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

  • मजदूरों को राहत: दोपहर 11:30 से शाम 3:30 बजे तक कड़ी धूप में मजदूरी न करने की सलाह दी गई है।

  • हीट वेव इंश्योरेंस: सरकार ‘पैरामीट्रिक बीमा’ पर विचार कर रही है। इसमें अगर तापमान तय सीमा से ऊपर जाता है, तो रेहड़ी-पटरी वालों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।

  • पौधारोपण: ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के तहत अब तक 21 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

आम जनता के लिए ‘जीवन रक्षक’ सलाह

  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें।

  • भले ही प्यास न लगे, हर घंटे पानी पीते रहें। ओआरएस (ORS), नींबू पानी और लस्सी का सेवन करें।

  • हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय सिर को ढक कर रखें।

  • अगर चक्कर आए या तेज़ बुखार हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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