BNT Desk: : बिहार सरकार ने राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और घायलों की जान बचाने के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सोमवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में परिवहन विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जो न केवल सड़क अनुशासन सुधारेंगे, बल्कि हादसों के शिकार लोगों के लिए ‘जीवनदान’ साबित होंगे।
‘गोल्डन आवर’ में मुफ्त इलाज: 1.5 लाख रुपये तक की मदद
सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे चिकित्सा की भाषा में “गोल्डन आवर” कहा जाता है। सरकार ने फैसला लिया है कि इस दौरान घायल व्यक्ति को इलाज के लिए पैसों की चिंता नहीं करनी होगी।
-
नकद रहित सुविधा: राज्य के चिह्नित ट्रॉमा सेंटरों और प्रमुख अस्पतालों में घायलों को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाएगा।
-
उद्देश्य: अक्सर देखा जाता है कि अस्पताल पहुंचने पर परिजनों की अनुपस्थिति या पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी होती है, जिससे घायल की मौत हो जाती है। अब इस कैशलेस सुविधा से गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
हाई-टेक होगी ट्रैफिक व्यवस्था: PPP मोड पर चलेगा मैनेजमेंट
राजधानी पटना समेत बिहार के बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए सरकार ने नई तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है।
-
ITMS सिस्टम: ‘इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम’ (ITMS) को अब पीपीपी (PPP) मोड पर लागू किया जाएगा।
-
स्मार्ट निगरानी: इस सिस्टम के तहत पूरे शहर में हाई-टेक कैमरे लगाए जाएंगे, जो यातायात की 24 घंटे निगरानी करेंगे। नियम तोड़ने वालों का ऑटोमेटिक चालान कटेगा।
-
डाटा विश्लेषण: हादसों को ‘माइनर’ (छोटे) और ‘मेजर’ (बड़े) श्रेणियों में बांटकर उनके कारणों की जांच की जाएगी, ताकि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) को सुधारा जा सके।
ड्राइवर ट्रेनिंग की नई व्यवस्था: 1 मई से लागू होगा नियम
सड़क हादसों का एक बड़ा कारण ड्राइवरों का प्रशिक्षित न होना है। इसे देखते हुए सरकार ने ट्रेनिंग प्रोग्राम में बड़े बदलाव किए हैं:
-
प्रोत्साहन राशि: 1 मई से जो भी चालक ट्रेनिंग लेंगे, उन्हें 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
-
भारी वाहन चालकों को चेतावनी: भारी वाहन (HMV) चालकों के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई चालक तीन बार बुलाए जाने के बाद भी ट्रेनिंग सेंटर नहीं आता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-
ट्रैकिंग मॉड्यूल: जिला-वार एक ड्राइवर ट्रैकिंग मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है, जिससे सरकार के पास हर प्रशिक्षित चालक का पूरा डेटाबेस उपलब्ध रहेगा।