BNT Desk: तमिलनाडु के विरुधुनगर में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे देश को दहला दिया है। इस हादसे में अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें 19 महिलाएं शामिल हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, फैक्ट्री मालिक और प्रबंधन की ऐसी भयानक लापरवाहियां सामने आ रही हैं, जिन्होंने इस कारखाने को ‘मौत का चैंबर’ बना दिया था।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के कई शेड मलबे में तब्दील हो गए। जांच अधिकारियों का मानना है कि रसायनों के मिश्रण के दौरान हुए घर्षण (Friction) ने इस तबाही की चिंगारी सुलगाई।
रसायनों का असुरक्षित मेल और ‘घर्षण’ बना काल
प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह रसायनों को मिलाते समय बरती गई असावधानी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब रसायनों का मिश्रण तैयार किया जा रहा था, तब घर्षण के कारण आग लग गई और देखते ही देखते पूरी फैक्ट्री बारूद के ढेर की तरह उड़ गई। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री के छह शेड पूरी तरह से जमींदोज हो गए।
सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन: 4 की जगह 20 मजदूर
नियमों के अनुसार, पटाखा फैक्ट्री के एक कमरे में अधिकतम 3 से 4 मजदूर ही काम कर सकते हैं ताकि किसी हादसे की स्थिति में जनहानि कम हो। लेकिन विरुधुनगर की इस फैक्ट्री में सुरक्षा को ताक पर रखकर एक ही कमरे में करीब 20 लोगों को झोंक दिया गया था। यही कारण है कि मृतकों की संख्या इतनी अधिक रही।
गोदाम बन गए थे कमरे, निकास द्वार भी गायब
जांच में यह भी पाया गया कि जिन कमरों को सुरक्षित दूरी पर होना चाहिए था, उन्हें अवैध रूप से आपस में जोड़कर गोदाम बना दिया गया था। इससे आग एक कमरे से दूसरे कमरे में बिजली की गति से फैली। इसके अलावा, नियमों के मुताबिक फैक्ट्री में 4 आपातकालीन निकास (Exit) होने चाहिए थे, लेकिन वहां केवल 2 ही द्वार थे, जिससे भगदड़ के दौरान लोग बाहर नहीं निकल पाए।
रद्द लाइसेंस के बावजूद ‘किराये’ पर चल रहा था मौत का खेल
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही अस्थायी रूप से रद्द किया जा चुका था। इसके बावजूद, फैक्ट्री मालिक ने इसे किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर दे दिया था, जो अवैध रूप से और बिना किसी सुरक्षा मानकों के इसे चला रहा था। प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर मासूम मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा था।
पहचान के लिए DNA टेस्ट का सहारा
हादसा इतना वीभत्स था कि कई शव कोयला बन चुके हैं। उनकी पहचान करना नामुमकिन हो गया है। अस्पतालों के बाहर परिजनों का जमावड़ा लगा है और पुलिस डीएनए (DNA) जांच के जरिए शवों की पहचान कराने की कोशिश कर रही है। अपनों को खो चुके लोग अब इस बात की पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं कि मिला हुआ शव उनके सगे-संबंधी का है या नहीं।
विशेषज्ञों की राय: मशीनीकरण और प्रशिक्षण है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखा उद्योग में रसायनों का असुरक्षित भंडारण और तय सीमा से अधिक मजदूरों को रखना ही हादसों की जड़ है। सुधार के लिए निम्नलिखित उपाय जरूरी हैं:
-
खतरनाक प्रक्रियाओं (मिश्रण, भराई और पैकिंग) को अलग-अलग स्थानों पर करना।
-
सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और मशीनों का बढ़ता इस्तेमाल।
-
मजदूरों को रसायनों के साथ काम करने का विशेष प्रशिक्षण देना।