सोनपुर के नयागांव में टाउनशिप के नाम पर बड़ा खेल: Keshari Vatika क्या यह भी है जाल?

Parambir Singh
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Parambir Singh
Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के...
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बिहार के सारण जिला अंतर्गत नयागांव और आसपास के इलाकों में जमीन और टाउनशिप के नाम पर एक बड़ा खेल चल रहा है। ‘सपनों का शहर’ बसाने के लुभावने वादों के बीच अब एक नया नाम तेजी से उभर कर सामने आया है— ‘केशरी वाटिका’ (Keshari Vatika)। आकर्षक विज्ञापनों और “आज निवेश, कल मुनाफा” के नारों के साथ बेचे जा रहे इन प्लॉट्स को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

दावे बड़े, पर कानूनी आधार गायब?

केशरी वाटिका प्रोजेक्ट के तहत यह दावा किया जा रहा है कि यह मुख्य हाईवे से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ 1200 से लेकर 1600 स्क्वायर फीट तक के प्लॉट बेचे जा रहे हैं। लेकिन जब हमारी टीम ने इसकी पड़ताल की और दिए गए नंबरों पर संपर्क किया, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई।

सेल्स से जुड़े कर्मियों ने खुद स्वीकार किया कि यह प्रोजेक्ट रेरा (RERA) से रजिस्टर्ड नहीं है। जमीन को “डायरेक्ट” तरीके से बेचने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई प्रोजेक्ट एक तय सीमा से बड़ा है और उसमें टाउनशिप या प्लॉटिंग का दावा किया जा रहा है, तो उसका रेरा पंजीकरण अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के जमीन बेचना न केवल अवैध है, बल्कि खरीदारों के लिए भारी जोखिम भरा भी है।

धरातल पर शून्य विकास, सिर्फ खंभों का सहारा

स्थानीय लोगों और संभावित खरीदारों ने जब मौके पर जाकर प्रोजेक्ट का मुआयना किया, तो वहाँ ‘टाउनशिप’ जैसी कोई चीज नजर नहीं आई।

  • बुनियादी सुविधाओं का अभाव: न पक्की सड़कें हैं, न बिजली के खंभे और न ही पानी की कोई ठोस व्यवस्था।

  • कच्ची जमीन का खेल: सिर्फ जमीन पर कुछ सीमेंट के खंभे गाड़कर प्लॉटिंग का निशान बना दिया गया है।

  • सपनों का सौदा: टाउनशिप का भव्य सपना दिखाकर असल में सिर्फ कच्ची जमीन के टुकड़े बेचे जा रहे हैं, जिसमें भविष्य में किसी भी विकास की कोई कानूनी गारंटी नहीं है।

वही पुराना पैटर्न: भरोसे का कत्ल

नयागांव में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसी कंपनियां आई जिन्होंने लोगों को विकसित प्लॉट का झांसा दिया और उनकी जीवन भर की जमा पूंजी लेकर गायब हो गईं। बिना किसी नियामकीय मंजूरी (Regulatory Approval) के सिर्फ कागजों और वादों के दम पर चल रहा यह कारोबार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है।

निवेशकों के लिए चेतावनी: बरतें ये सावधानियां

जानकारों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करना “सपनों के जाल” में फंसने जैसा है। किसी भी जमीन या टाउनशिप में पैसा लगाने से पहले इन बिंदुओं की जांच अवश्य करें:

  1. RERA रजिस्ट्रेशन: क्या प्रोजेक्ट रेरा की वेबसाइट पर लिस्टेड है?

  2. जमीन का टाइटल: क्या जमीन कंपनी के नाम पर है या सिर्फ एग्रीमेंट के आधार पर बेची जा रही है?

  3. डेवलपमेंट प्लान: क्या नक्शा पास है और विकास की कोई समयसीमा (Timeline) तय है?

जानकार कहते हैं कि नयागांव की जमीन पर ‘केशरी वाटिका’ जैसे प्रोजेक्ट्स की जो कहानी सामने आ रही है, वह सिर्फ एक रियल एस्टेट डील नहीं है। यह एक ऐसे सिस्टम की ओर इशारा करती है जहाँ नियमों को ताक पर रखकर लोगों के भरोसे का सौदा किया जा रहा है। अब गेंद प्रशासन और नियामक संस्थाओं के पाले में है कि वे इस ‘खेल’ पर कब लगाम लगाते हैं।

सतर्क रहें, सुरक्षित निवेश करें।

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Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी कंटेंट निर्माण का अनुभव रखते हैं।