BNT Desk: चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और ‘थाला’ धोनी के प्रशंसकों के लिए शनिवार की सुबह एक बुरी खबर लेकर आई। IPL 2026 का रोमांच अभी शुरू ही हुआ था कि सीएसके के सबसे अनुभवी खिलाड़ी एमएस धोनी के चोटिल होने की पुष्टि हो गई। धोनी की गैरमौजूदगी न केवल टीम के कॉम्बिनेशन को बिगाड़ सकती है, बल्कि मैदान पर उनकी जादुई रणनीति की कमी भी खलेगी।
क्या है धोनी की चोट की वजह?
जानकारी के अनुसार, धोनी को पिंडली (काफ मसल) में खिंचाव की समस्या हुई है। यह चोट अभ्यास सत्र के दौरान लगी, जिसके बाद मेडिकल टीम ने उन्हें कम से कम दो सप्ताह (14 दिन) के पूर्ण आराम की सलाह दी है।
सीएसके (CSK) ने शनिवार सुबह अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि धोनी फिलहाल मेडिकल टीम की कड़ी निगरानी में हैं। फ्रेंचाइजी ने प्रशंसकों से धैर्य रखने की अपील की है और कहा है कि धोनी की रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इन 3 अहम मैचों में नहीं दिखेंगे ‘माही’
धोनी के बाहर होने का मतलब है कि चेन्नई सुपर किंग्स को अपने शुरुआती तीन सबसे कड़े मुकाबले बिना उनके खेलने होंगे। इन मैचों का शेड्यूल इस प्रकार है:
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30 मार्च: बनाम राजस्थान रॉयल्स (गुवाहाटी में)
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3 अप्रैल: बनाम पंजाब किंग्स (चेन्नई के होम ग्राउंड चेपॉक में)
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5 अप्रैल: बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (बेंगलुरु में)
खासकर 5 अप्रैल को होने वाला RCB vs CSK मैच, जिसे आईपीएल का ‘एल क्लासिको’ माना जाता है, उसमें धोनी का न होना फैंस के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
वापसी कब होगी?
अगर धोनी की रिकवरी योजना के अनुसार चलती है, तो उनकी मैदान पर वापसी 11 अप्रैल को हो सकती है। उस दिन चेन्नई का मुकाबला दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ होना तय है। टीम मैनेजमेंट को उम्मीद है कि धोनी तब तक पूरी तरह फिट होकर विकेट के पीछे अपनी जगह संभाल लेंगे।
फिटनेस और धोनी का पुराना संघर्ष
पिछले कुछ सालों में धोनी के लिए फिटनेस एक बड़ी चुनौती रही है।
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आईपीएल 2024: पिछले सीजन में भी धोनी घुटने की गंभीर चोट के बावजूद खेलते नजर आए थे। मैच के बाद अक्सर उनके घुटने पर आइस पैक लगा देखा जाता था।
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सर्जरी: पिछले सीजन के बाद उन्होंने अपने घुटने की सर्जरी भी कराई थी।
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उम्र का तकाजा: 40 की उम्र पार कर चुके धोनी के लिए आईपीएल जैसे लंबे और थका देने वाले टूर्नामेंट में खुद को 100% फिट रखना मुश्किल होता जा रहा है।
सीएसके के लिए चुनौती
धोनी भले ही अब कप्तान नहीं हैं, लेकिन मैदान पर फील्डिंग सजाने से लेकर गेंदबाजों को निर्देश देने तक, उनकी भूमिका एक मार्गदर्शक की रहती है। उनकी अनुपस्थिति में टीम के वर्तमान कप्तान और युवा खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ जाएगा। अब देखना होगा कि ‘कैप्टन कूल’ के बिना चेन्नई की टीम इन तीन शुरुआती चुनौतियों से कैसे निपटती है।