प्रदूषण पर पटना हाईकोर्ट का सख्त रुख, रात 10 बजे के बाद डीजे बजा तो होगी कार्रवाई

पटना हाईकोर्ट ने साउंड और एयर पॉल्यूशन को लेकर सख्त आदेश दिया है। अब रात 10 बजे के बाद डीजे, पटाखा या कचरा जलाने की शिकायत डायल 112 पर की जा सकती है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखने और कार्रवाई की रिपोर्ट 10 अप्रैल तक देने का निर्देश दिया है।

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BNT Desk: पटना में बढ़ते ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर रात 10 बजे के बाद कहीं डीजे बजता है, पटाखे चलाए जाते हैं या कचरा जलाया जाता है, तो नागरिक तुरंत डायल 112 पर शिकायत कर सकते हैं। कोर्ट ने बिहार के DGP को निर्देश दिया है कि शिकायत करने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। साथ ही 10 अप्रैल तक यह रिपोर्ट भी पेश करने को कहा गया है कि कितनी शिकायतें मिलीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

शिकायत करने वालों को नहीं होगा डर

कोर्ट के इस आदेश का मकसद यह है कि लोग बिना किसी डर के शिकायत कर सकें। कई बार लोग मोहल्ले में दबंग या प्रभावशाली लोगों के कारण शिकायत नहीं कर पाते। अब पुलिस को आदेश दिया गया है कि शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जाए और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए।

थानेदारों को कोर्ट में किया तलब

इस मामले में कोर्ट ने पटना के रूपसपुर और बुद्धा कॉलोनी थानेदारों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कारण यह है कि उन्होंने अदालत में जो रिपोर्ट दी, वह स्पष्ट नहीं थी और कार्रवाई की जानकारी ठीक से नहीं दी गई थी। इसके अलावा गांधी मैदान, पिरबहोर और कदमकुआं थानों से भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कोर्ट ने पूछा है कि पिछले चार महीनों यानी नवंबर से मार्च तक कितने डीजे जब्त किए गए और कितना जुर्माना वसूला गया।

अच्छे काम करने वालों की सराहना

कोर्ट ने जहां लापरवाही करने वाले अधिकारियों को फटकार लगाई, वहीं अच्छा काम करने वाले अधिकारियों की तारीफ भी की। अदालत ने पटना के SSP और मसौढ़ी के SDM के काम की सराहना की।

सरकारी एजेंसियों पर भी लगेगा जुर्माना

कोर्ट ने साफ कहा है कि नियम सिर्फ आम लोगों के लिए नहीं हैं। अगर कोई सरकारी एजेंसी भी प्रदूषण फैलाती है, तो उस पर भी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा स्कूल और अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के पास हॉर्न बजाने पर भी सख्ती बरतने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि जमीन पर भी दिखने चाहिए।

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