BNT Desk: बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने पिछले 100 दिनों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने का दावा किया है। विभाग का कहना है कि अवैध खनन को रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं। इन प्रयासों के कारण राज्य सरकार की आय में भी बढ़ोतरी हुई है और अवैध खनन पर काफी हद तक रोक लगाने में सफलता मिली है।
‘बिहार खनन योद्धा’ योजना से मिल रहा फायदा
अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने ‘बिहार खनन योद्धा’ योजना शुरू की है। इस योजना के तहत अवैध खनन या ओवरलोड वाहनों की सूचना देने वाले लोगों को इनाम दिया जाता है। अब तक 71 लोगों को सरकार की ओर से पुरस्कृत किया जा चुका है। यदि कोई व्यक्ति बड़ी ओवरलोड गाड़ी पकड़वाने में मदद करता है तो उसे 10 हजार रुपये, जबकि छोटी गाड़ी पकड़वाने पर 5 हजार रुपये का इनाम दिया जाता है।
राजस्व में हुई बड़ी बढ़ोतरी
सरकार का दावा है कि इस योजना के शुरू होने से पहले राज्य को खनन से लगभग 1600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। लेकिन योजना लागू होने के बाद राजस्व बढ़कर करीब 3500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे साफ है कि अवैध खनन पर नियंत्रण और निगरानी से राज्य की आय में बड़ा इजाफा हुआ है।
बालू माफियाओं पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने बालू माफियाओं के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार कई जगहों पर बालू माफिया काफी प्रभावशाली हैं और वे अन्य लोगों को बालू घाटों की नीलामी में हिस्सा लेने से रोकते हैं। इसी कारण कई जगहों पर बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की तैयारी
सरकार ने फैसला किया है कि ऐसे बाहुबली ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखा जाएगा, जो नीलामी में बाधा डालते हैं या पहले बालू घाट लेकर उसे सरेंडर कर देते हैं। इस कदम से टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और नए लोगों को मौका देने की कोशिश की जा रही है।
24 घंटे निगरानी से रोकने की कोशिश
अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सरकार 24 घंटे और सातों दिन निगरानी कर रही है। इसके लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक और सख्त कार्रवाई के जरिए अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा रहा है।