BNT Desk: मिथुन चक्रवर्ती के बेटे मिमोह चक्रवर्ती इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। उनकी नई हॉरर फिल्म ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रही है। तमाम विपरीत परिस्थितियों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद फिल्म दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में कामयाब रही है।
बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे मिमोह चक्रवर्ती के लिए यह फिल्म न केवल एक प्रोजेक्ट है, बल्कि उनके करियर के लिए एक संजीवनी की तरह है। 16 साल के लंबे इंतजार के बाद मिली इस सफलता ने मिमोह के प्रशंसकों में खुशी की लहर दौड़ दी है।
संघर्षों से भरी राह और बॉक्स ऑफिस पर धमाका
रिलीज से पहले इस फिल्म की राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी। मिमोह के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं, जैसे कि सीमित स्क्रीन मिलना, कोई बड़ा नामचीन सुपरस्टार न होना और उसी दौरान अन्य बड़ी फिल्मों का रिलीज होना। फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों को लग रहा था कि यह फिल्म शायद ही अपनी लागत निकाल पाएगी, लेकिन दर्शकों ने इसे सर आंखों पर बिठा लिया।
फिल्म ने रिलीज के शुरुआती 4 दिनों के भीतर ही लगभग 13 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है। यह आंकड़ा न केवल प्रभावशाली है, बल्कि यह साबित करता है कि अगर कहानी में दम हो और दर्शकों का जुड़ाव हो, तो बिना बड़े बजट और स्टार-पावर के भी फिल्में सफल हो सकती हैं।
मिमोह का भावुक बयान: “आखिरी वक्त तक किया संघर्ष”
मिमोह चक्रवर्ती ने 2008 में फिल्म ‘जिमी’ से अपने करियर का आगाज किया था। इसके बाद 2011 में आई उनकी ‘हॉन्टेड 3D’ ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन उसके बाद का सफर काफी कठिन रहा। लगभग 15-16 साल का लंबा समय मिमोह के लिए एक मजबूत वापसी की तलाश में बीता।
एक प्रमुख इंटरव्यू में अपने दिल की बात साझा करते हुए मिमोह ने कहा, “मैं फिल्म को मिले रिस्पॉन्स से बेहद खुश हूं। हमने तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बीच आखिरी दम तक हार नहीं मानी और संघर्ष जारी रखा। आज दर्शकों से मिल रही तारीफ मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। यह प्यार ही है जिसने हमारे पूरे प्रयास को सफल बनाया है।”
VFX और AI का प्रयोग और उठते सवाल
फिल्म के तकनीकी पहलुओं को लेकर सोशल मीडिया और थिएटर में दर्शकों के बीच खासी चर्चा है। कई दर्शकों ने गौर किया कि फिल्म में VFX (विजुअल इफेक्ट्स) और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। कहीं-कहीं तकनीकी बारीकियों में छोटी-छोटी गड़बड़ियां भी नजर आईं, जैसे कि कुछ दृश्यों में अचानक कार की नंबर प्लेट बदल जाना या ग्राफिक्स का तालमेल न बैठना।
इन सवालों पर मिमोह ने बड़ी सादगी से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म को 3D प्रारूप में प्रभावी बनाने के लिए AI की मदद ली गई थी। दरअसल, डायरेक्टर विक्रम भट्ट की सोच के अनुसार जो विजुअल वास्तविक शूटिंग में नहीं मिल पा रहे थे, उन्हें टेक्नोलॉजी के जरिए पूरा किया गया।
‘कोई फिल्म परफेक्ट नहीं होती’: मिमोह का नजरिया
टेक्नोलॉजी को लेकर पूछे गए सवालों पर मिमोह ने काफी हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने हंसते हुए कहा, “मुझे वीडियो गेम्स की काफी समझ है, लेकिन फिल्म निर्माण में इस्तेमाल होने वाली इस आधुनिक टेक्नोलॉजी के बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता। इसके तकनीकी पहलुओं के बारे में सही जवाब तो डायरेक्टर विक्रम भट्ट सर ही दे सकते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा, “फिल्म निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है और मुझे नहीं लगता कि दुनिया की कोई भी फिल्म पूरी तरह से परफेक्ट होती है। दर्शक अगर चाहें तो कमियां ढूंढ ही लेते हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि उन्हें कहानी पसंद आ रही है।”
भविष्य की ओर बढ़ते कदम
मिमोह चक्रवर्ती के लिए यह फिल्म एक नई शुरुआत की तरह है। इतने लंबे संघर्ष के बाद मिली यह सफलता उन्हें आगामी प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक आत्मविश्वास प्रदान करेगी। यह फिल्म न केवल हॉरर जॉनर के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन अनुभव है, बल्कि मिमोह की अभिनय क्षमता को साबित करने का एक मंच भी बनी है। निश्चित रूप से, ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ बॉलीवुड में मिमोह की नई पारी की एक सशक्त शुरुआत है।