BNT Desk: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने शिक्षक और स्नातक कोटे की छह सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने पहली बार एक साथ सभी छह सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है। प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अब पार्टी के भीतर से ही नाराजगी के सुर सामने आने लगे हैं। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में पार्टी के पुराने और समर्पित नेताओं-कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पार्टी और संगठन के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को दरकिनार कर चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आए चेहरों को प्राथमिकता देना चिंता का विषय है।
RJD ने छह सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार
RJD ने शिक्षक और स्नातक कोटे की छह विधान परिषद सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम सामने रखे हैं। पार्टी ने पटना शिक्षक सीट से पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह, पटना स्नातक सीट से दिलीप कुमार, कोसी स्नातक सीट से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक सीट से अनिल कुमार झा, तिरहुत शिक्षक सीट से डॉ. रश्मि विनायक गौतम और सारण शिक्षक सीट से प्रो. जयराम यादव को उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवारों के ऐलान के बाद पार्टी के अंदर इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर उन नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं, जो लंबे समय से संगठन के साथ जुड़े रहे हैं।
संजीव कुमार सिंह के नाम पर भी उठे सवाल
पटना शिक्षक सीट से उम्मीदवार बनाए गए डॉ. संजीव कुमार सिंह विधानसभा चुनाव से पहले JDU छोड़कर RJD में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्हें विधान परिषद चुनाव में पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर अब राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी उम्मीदवार का नाम लेकर सीधे हमला नहीं किया, लेकिन उनके बयान को RJD की ओर से घोषित उम्मीदवारों के चयन से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही है।
रोहिणी बोलीं- अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना अनादर
रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि “वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर ऐन चुनाव (विधान परिषद चुनाव) से पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं-कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का घोर अनादर है।” उन्होंने आगे कहा कि दशकों तक संघर्ष करने वाले नेताओं को दरकिनार करना पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि ऐसा फैसला निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है। उनके मुताबिक इससे लालू प्रसाद यादव की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का लगाया आरोप
रोहिणी के बयान का मुख्य फोकस पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक पार्टी के लिए संघर्ष किया और संगठन को मजबूत करने में योगदान दिया, उन्हें चुनावी राजनीति में उचित महत्व मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि अगर ऐसे कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता है और चुनाव के समय नए चेहरों को प्राथमिकता मिलती है, तो इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में निराशा पैदा हो सकती है। हालांकि, रोहिणी आचार्य के बयान के बाद RJD की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस खबर में नहीं है।
पटना की दोनों सीटों पर मुकाबला दिलचस्प
विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की छह सीटों में पटना की शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पटना स्नातक सीट पर JDU की ओर से पूर्व मंत्री नीरज कुमार के चुनाव लड़ने की चर्चा है। नीरज कुमार इस सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में अगर वह फिर मैदान में उतरते हैं तो RJD के उम्मीदवार दिलीप कुमार के सामने मजबूत राजनीतिक चुनौती होगी। वहीं पटना शिक्षक सीट पर भी मुकाबला महत्वपूर्ण रहने की संभावना है। RJD ने यहां पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार सिंह को मैदान में उतारा है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब आने वाले दिनों में चुनावी समीकरण और दावेदारियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
उम्मीदवारों की घोषणा के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
RJD की ओर से सभी छह उम्मीदवारों के नाम एक साथ घोषित किए जाने के बाद बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव को लेकर हलचल बढ़ गई है। एक तरफ पार्टी चुनावी तैयारी में जुट रही है, वहीं दूसरी तरफ रोहिणी आचार्य के बयान ने संगठन के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को किस तरह लेता है और चुनावी मैदान में उम्मीदवारों के समर्थन में संगठन किस तरह एकजुट होता है। फिलहाल रोहिणी आचार्य के बयान ने RJD के उम्मीदवार चयन को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर तेज कर दी है।