BNT Desk: बिहार की राजनीति में जाति और कानून-व्यवस्था हमेशा से ही बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं। हाल के दिनों में राज्य में हुए पुलिस एनकाउंटरों को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही जुबानी जंग जारी थी, लेकिन सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अजय कुशवाहा के एक ताजा बयान ने इस विवाद में घी डालने का काम कर दिया है।
जेडीयू विधायक के इस बयान के बाद बिहार के सियासी गलियारों में एक नया संग्राम छिड़ गया है। बिहार में हो रहे पुलिस एनकाउंटरों पर दिए गए उनके इस जातिगत बयान को लेकर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य यादव नेताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
तेजस्वी यादव के आरोपों पर जेडीयू का तीखा पलटवार
यह पूरा विवाद दरअसल आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन ‘जाति देखकर’ अपराधियों का एनकाउंटर कर रहे हैं। तेजस्वी के इसी ‘जातिगत एनकाउंटर’ वाले आरोप पर पलटवार करते हुए जेडीयू विधायक अजय कुशवाहा ने एक बेहद तीखी और विवादित टिप्पणी कर दी।
अजय कुशवाहा ने सीधे तौर पर एक विशेष जाति (यादव समाज) को निशाना बनाते हुए कहा कि चूंकि अपराध की दुनिया में ज्यादातर लोग इसी समाज से आते हैं, इसलिए कार्रवाई के दौरान मारे जाने वाले लोगों में भी इनकी संख्या स्वाभाविक रूप से अधिक है।
‘क्रिमिनोलॉजी का 50 परसेंट वही लोग हैं’ – अजय कुशवाहा
विपक्ष पर हमला बोलते हुए जेडीयू विधायक अजय कुशवाहा बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाए और उन्होंने खुले तौर पर आंकड़े पेश करने का दावा किया। उन्होंने कहा:
विधायक का बयान: “तेजस्वी यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) वाले इस तरह की कार्रवाई पर ‘विधवा विलाप’ तो करेंगे ही। पूरे क्रिमिनोलॉजी (अपराध जगत) का अगर आप इतिहास उठाकर देखें, तो 50 परसेंट से कम तो उन लोगों (यादव समाज) की संख्या अपराधियों में है नहीं। जब पूरे अपराध जगत के 50 फीसदी लोग एक ही समाज से होंगे, तो कार्रवाई के दौरान मारा कौन जाएगा? यह बिल्कुल स्वाभाविक है कि वही लोग मारे जाएंगे। आप खुद रिकॉर्ड उठा कर देख लीजिए, आपको हकीकत पता चल जाएगी।”
‘कार्रवाई करो तो चिल्लाते हैं, न करो तो लॉ एंड ऑर्डर का रोना’
अजय कुशवाहा यहीं नहीं रुके, उन्होंने विपक्ष की राजनीति पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजद का यह पुराना तरीका रहा है कि जब राज्य में कोई आपराधिक घटना होती है और लॉ एंड ऑर्डर (कानून-व्यवस्था) थोड़ा भी प्रभावित होता है, तो तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी चिल्लाना शुरू कर देती है कि सरकार से सूबा संभल नहीं रहा है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है।
लेकिन, जब उसी कानून-व्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए पुलिस अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाती है और एनकाउंटर जैसी कार्रवाई होती है, तो यही लोग विक्टिम कार्ड खेलने लगते हैं और आरोप लगाते हैं कि सरकार जाति विशेष को देखकर निशाना बना रही है।
विपक्ष ने खोला मोर्चा: बयान पर चौतरफा घेराबंदी
जेडीयू विधायक के इस बयान के बाद आरजेडी खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक जिम्मेदार विधायक के मुंह से इस तरह की जातिगत और अमर्यादित भाषा शोभा नहीं देती। आरजेडी प्रवक्ताओं ने पलटवार करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी की सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए समाज में जातीय विद्वेष (नफरत) फैलाने का काम कर रही है।
विपक्ष का आरोप है कि किसी भी अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन जेडीयू के नेता जानबूझकर एक पूरे समाज को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं, जिसे बिहार की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
आगामी दिनों में और गरमाएगी बिहार की राजनीति
इस बयान ने बिहार के जातीय समीकरणों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजय कुशवाहा का यह बयान जेडीयू और नीतीश सरकार के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि वह ‘क्राइम और कम्युनलिज्म’ के मामले में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करती।
अब देखना यह होगा कि इस बयान पर मचे घमासान के बाद जेडीयू नेतृत्व अपने विधायक के बयान से किनारा करता है या इस पर कोई सफाई दी जाती है। लेकिन इतना तय है कि इस बयान के बाद आने वाले दिनों में बिहार की विधानसभा से लेकर सड़कों तक इस मुद्दे पर भारी हंगामा होना तय है।