BNT Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बड़ी सियासी हलचल सामने आई है। चुनाव को रद्द करने और नए सिरे से मतदान कराने की मांग को लेकर प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने कथित अवैध प्रथाओं और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी।
किस आधार पर दी गई है चुनौती
जन सुराज पार्टी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि आचार संहिता लागू रहने के दौरान राज्य में महिलाओं को सीधे ₹10,000 की राशि दी गई। पार्टी का कहना है कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला है और इसे भ्रष्ट आचरण माना जाना चाहिए। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन बताया गया है।
महिला योजनाओं पर उठाए सवाल
याचिका में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ने और उन्हें भुगतान करने को भी अवैध बताया गया है। जन सुराज पार्टी का दावा है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई है। इसके अलावा, दोनों चरणों के मतदान के दौरान जीविका से जुड़ी करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अनुचित करार दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग
जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, पार्टी ने एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) के फैसले का हवाला देते हुए मुफ्त योजनाओं और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पर सख्त दिशानिर्देश बनाने की मांग की है। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह महीने पहले ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर रोक की समयसीमा तय की जाए, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें।