पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय: 7.5 CGPA की अनिवार्यता के खिलाफ कल सड़कों पर उतरेगा AISA

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BNT Desk: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन और हाल ही में लागू किए गए 7.5 CGPA (कम्युलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज) के नए क्राइटेरिया को लेकर छात्र संगठनों में भारी आक्रोश है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने इस फैसले को ‘छात्र-विरोधी’ और ‘मनमाना’ करार देते हुए कल इसके खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।

क्या है विवाद का कारण?

छात्रों का मुख्य आरोप है कि चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (FYUGP) लागू करने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक चौथे वर्ष की पढ़ाई, मूल्यांकन और शोध प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दे पाया है। ऐसे में अचानक सातवें सेमेस्टर में प्रवेश के लिए 7.5 CGPA की अनिवार्यता थोप दी गई है।

छात्रों के सामने चुनौतियां

  • भविष्य पर संकट: छात्रों का मानना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के अचानक यह नियम लागू करने से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

  • मानसिक तनाव: विश्वविद्यालय प्रशासन के इस मनमाने फैसले से छात्रों में गहरा मानसिक तनाव और अनिश्चितता का माहौल है।

  • NEP पर सवाल: देश भर के विश्वविद्यालयों की तरह यहाँ भी छात्र और शिक्षक समुदाय NEP के प्रावधानों और उनकी अस्पष्टता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

 

AISA की प्रमुख मांगें

AISA का कहना है कि यह नियम पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और इसे बिना किसी व्यापक चर्चा के थोपा गया है। छात्र संगठन की मांग है कि:

  1. 7.5 CGPA की अनिवार्यता वाले इस ‘काले कानून’ को तुरंत वापस लिया जाए।

  2. विश्वविद्यालय प्रशासन स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष के संचालन और मूल्यांकन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।

 

विरोध प्रदर्शन की तैयारी

अपनी मांगों को लेकर AISA ने कल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन का उद्देश्य विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना है ताकि छात्रों के हितों की रक्षा हो सके और शैक्षणिक सत्र को लेकर व्याप्त अनिश्चितता को समाप्त किया जा सके।

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