भोजपुर: बिलौटी मुठभेड़ मामला पहुँचा NHRC, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस मुठभेड़ की घटना ने अब एक बड़ा रूप ले लिया है। भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद से ही इस मामले पर देशभर में चर्चा हो रही है।

NHRC में शिकायत और निष्पक्ष जांच की मांग

इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई (CBI) से कराई जाए।

शिकायत में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया है कि भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ थे, ऐसे में उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। इसे लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।

पुलिस का पक्ष: क्या था घटनाक्रम?

पुलिस ने अपनी कार्रवाई को उचित ठहराते हुए इस मामले में दो अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं:

  • पहली प्राथमिकी: यह भरत भूषण तिवारी के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि भरत के पास अवैध हथियार हैं। 17 जून की सुबह करीब 5:10 बजे जब पुलिस ने उनके घर की घेराबंदी की, तो भरत भूषण ने पिस्तौल तान दी और थानाध्यक्ष पर हमला करने की कोशिश की।

  • दूसरी प्राथमिकी: यह भरत भूषण के पिता काशी नाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ दर्ज की गई है। पुलिस का आरोप है कि उन्हें अवैध हथियार के बारे में जानकारी थी, फिर भी उन्होंने पुलिस को सूचित करने के बजाय भरत को संरक्षण दिया।

 

‘सरेंडर’ का नाटक और मुठभेड़ का अंत

पुलिस प्राथमिकी में यह दावा किया गया है कि भरत भूषण घर की छत पर चढ़कर पुलिस टीम पर लगातार फायरिंग करता रहा, जिससे जवान बाल-बाल बचे। बाद में, जब एसटीएफ और शाहपुर पुलिस ने उसे बधार (खेतों) में घेर लिया, तो वह बार-बार ‘सरेंडर’ का नाटक करने लगा।

पुलिस का कहना है कि भरत ने आत्मसमर्पण का दिखावा करते हुए पिस्तौल को कुछ दूरी पर फेंका, लेकिन जैसे ही पुलिस उसे जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, वह तेजी से झपटकर पिस्तौल उठा लेता और दोबारा पुलिस पर फायरिंग करने लगता था।

इस घटना के बाद से ही पुलिस की कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के उल्लंघन के दावों के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अब सभी की निगाहें NHRC की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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