मुंबई की हाई-प्रोफाइल नौकरी से IAS तक, जानिए पटना के नए डीएम कुंदन कुमार की कहानी

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BNT Desk: पटना की प्रशासनिक बागडोर अब एक ऐसे अधिकारी के हाथों में है, जो अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और लीक से हटकर सोचने के लिए मशहूर हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं कुंदन कुमार की। मुंगेर की मिट्टी से निकले और देश के शीर्ष प्रशासनिक पदों तक पहुँचे कुंदन कुमार की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

कॉर्पोरेट छोड़ने से लेकर प्रशासनिक शिखर तक

कुंदन कुमार का करियर किसी फिल्म की कहानी जैसा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई की एक बड़ी कंपनी में लगभग पाँच साल तक कॉर्पोरेट की दुनिया का अनुभव लिया। एक अच्छी-खासी सैलरी वाली नौकरी के बावजूद, उनके मन में हमेशा समाज और देश के लिए कुछ बड़ा करने की कसक थी। इसी चाहत ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) की राह दिखाई।

IPS से IAS तक: अटूट संकल्प

कुंदन कुमार का सफर प्रशासनिक सेवा के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है। साल 2009 में उन्होंने पहली बार UPSC परीक्षा पास की और IPS के रूप में अपनी सेवा शुरू की। लेकिन उनका सपना कुछ और ही था। वे IAS बनकर नीति-निर्माण में बड़ी भूमिका निभाना चाहते थे। इस लक्ष्य के लिए उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा परीक्षा दी। अंततः, 2012 में उनका सपना पूरा हुआ और वे IAS अधिकारी बने। यह उनके दृढ़ संकल्प की जीत थी।

प्रधानमंत्री से मिला दो बार सम्मान

कुंदन कुमार की कार्यक्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें दो बार प्रधानमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया गया है।

  • पहला सम्मान: बांका जिले में उनके द्वारा शुरू किए गए डिजिटल शिक्षा और कृषि सुधारों के कार्यों के लिए उन्हें नवाजा गया।

  • दूसरा सम्मान: पश्चिम चंपारण में ‘चनपटिया स्टार्टअप जोन’ के सफल मॉडल के लिए। कोरोना काल में जब बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर घर लौटे थे, तो कुंदन कुमार ने उन्हें रोजगार देने के लिए चनपटिया मॉडल खड़ा किया, जिससे हजारों लोगों की जिंदगी संवर गई।

 

ज़मीनी बदलाव के मास्टरमाइंड

कुंदन कुमार सिर्फ फाइलें निपटाने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे ज़मीनी हकीकत को बदलने में विश्वास रखते हैं।

  • खेती में नया प्रयोग: बांका में उन्होंने ‘एग्री अस्मिता’ प्रोजेक्ट शुरू किया। उन्होंने किसानों को सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित न रखकर नकदी फसलों जैसे ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और बेबी कॉर्न की ओर प्रेरित किया।

  • शिक्षा में नवाचार: पूर्णिया में तैनाती के दौरान उन्होंने सरकारी स्कूलों की सूरत बदली। उन्होंने वहां लाइव डिजिटल क्लास शुरू करवाई, जिससे ग्रामीण बच्चों को आधुनिक शिक्षा का लाभ मिला।

 

पटना से बड़ी उम्मीदें

अब कुंदन कुमार पटना के प्रशासनिक प्रमुख के तौर पर नियुक्त हुए हैं। पटना जैसे शहर में चुनौतियां कम नहीं हैं। यहाँ का ट्रैफिक जाम, जलजमाव, शहरी विकास और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हमेशा से बड़ी समस्या रहे हैं।

पटना की जनता अब उम्मीद कर रही है कि जिस इनोवेटिव तरीके से कुंदन कुमार ने बांका और चंपारण की तस्वीर बदली है, वही जादू वे पटना में भी चलाएंगे। एक कुशल प्रशासक और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी के रूप में उनकी पहचान को देखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वे आने वाले समय में पटना को एक आधुनिक और व्यवस्थित राजधानी के रूप में विकसित करेंगे।

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