BNT Desk: बिहार में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने और छात्रों को बेहतर माहौल प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने निजी और गैर-सरकारी विद्यालयों के लिए संबद्धता (Affiliation) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने ‘बिहार विद्यालय परीक्षा समिति संबद्धता (संशोधन) नियमावली, 2026’ लागू कर दी है, जिसके तहत स्कूलों को अब कड़े मानकों का पालन करना होगा।
भूमि और बुनियादी ढांचे के नए मानक
नई नियमावली के अनुसार, अब किसी भी स्कूल को मान्यता तब तक नहीं मिलेगी जब तक वह भूमि और भवन संबंधी शर्तों को पूरा नहीं करता। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मानक तय किए गए हैं:
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ग्रामीण क्षेत्र: उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए न्यूनतम 6000 वर्ग मीटर जमीन अनिवार्य है, जिसमें से 2000 वर्ग मीटर खेल मैदान के लिए होना चाहिए।
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शहरी क्षेत्र: पटना नगर क्षेत्र के लिए न्यूनतम 3200 वर्ग मीटर और अन्य शहरी क्षेत्रों के लिए 4000 वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य की गई है।
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सुरक्षा मानक: स्कूल परिसर की चारदीवारी अनिवार्य है। यदि खेल का मैदान स्कूल से दूर है, तो वह 200 मीटर से अधिक दूर नहीं होना चाहिए और रास्ते में कोई व्यस्त सड़क या नेशनल हाईवे नहीं होना चाहिए।
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स्वामित्व: स्कूल की जमीन या तो संस्थान के नाम पर पंजीकृत होनी चाहिए या कम से कम 30 वर्षों की लीज पर होनी चाहिए।
क्लासरूम, प्रयोगशाला और पुस्तकालय
शिक्षा विभाग ने केवल जमीन ही नहीं, बल्कि अंदरूनी सुविधाओं के लिए भी सख्त मानक तय किए हैं:
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निर्मित क्षेत्र: माध्यमिक विद्यालयों के लिए 870 वर्ग मीटर और उच्च माध्यमिक के लिए 880 वर्ग मीटर का निर्मित क्षेत्र होना जरूरी है।
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आवश्यक सुविधाएं: 35-35 वर्ग मीटर के छह क्लासरूम, भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं, 50 वर्ग मीटर का कंप्यूटर कक्ष और 50 वर्ग मीटर की लाइब्रेरी अनिवार्य है।
संबद्धता की प्रक्रिया और शुल्क
अब संबद्धता प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है:
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ऑनलाइन शुल्क: आवेदन करने के लिए 15,000 रुपये का निरीक्षण शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा, जो नॉन-रिफंडेबल होगा।
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अस्थायी मान्यता: पहली बार में केवल 5 वर्षों की अस्थायी संबद्धता मिलेगी। इसके बाद विभागीय समीक्षा और निरीक्षण के आधार पर ही नवीनीकरण (Renewal) किया जाएगा।
नियमों का उल्लंघन पड़ा भारी
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल फर्जी नामांकन, गलत दस्तावेज, वित्तीय अनियमितता या सामाजिक वैमनस्य फैलाने जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और संतोषजनक जवाब न मिलने पर मान्यता को निलंबित या रद्द कर दिया जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद
शिक्षा विभाग का मानना है कि इन सख्त नियमों से उन स्कूलों पर अंकुश लगेगा जो बुनियादी सुविधाओं के बिना चल रहे थे। यह बदलाव राज्य में एक सुरक्षित, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार के लाखों छात्रों को लाभ होगा और राज्य की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।