पटना: PMCH में इलाज में लापरवाही; 16 वर्षीय अमन की मौत के बाद 7 डॉक्टर और 2 स्वास्थ्य प्रबंधक नपे, जारी हुआ नोटिस

BiharNewsAuthor
5 Min Read

BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, PMCH में इलाज में लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण 16 वर्षीय अमन कुमार गुप्ता की दर्दनाक मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। घटना की जांच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके बाद सात डॉक्टरों और दो स्वास्थ्य प्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

क्या था पूरा मामला?

घटना 5 जून की है, जब पटना के आनंदपुरी निवासी 16 वर्षीय अमन कुमार गुप्ता साइकिल से जेपी पथ से कहीं जा रहा था। इसी दौरान एक अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में अमन के बाएं पैर की हड्डी कई जगह से टूट गई थी और उसके सिर व नाक में भी गंभीर चोटें आई थीं। स्थानीय लोगों और परिजनों की तत्परता से उसे आनन-फानन में इलाज के लिए PMCH लाया गया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद अमन की स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन वहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उसे देखने में घोर लापरवाही बरती। किशोर को घंटों तक ट्रॉली पर ही छोड़ दिया गया। अस्पताल प्रशासन के लोग इलाज शुरू करने के बजाय परिजनों के आने का इंतजार करते रहे। इस बीच अमन का लगातार रक्तस्राव होता रहा, लेकिन समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिला, जिससे अंततः उसने दम तोड़ दिया।

पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन और खुलासा

इस घटना के बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया और अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए PMCH अधीक्षक डॉ. राजीव सिंह ने तत्काल एक पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति की अध्यक्षता स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्राध्यापक डॉ. मीनू शरण को सौंपी गई थी।

समिति ने मामले की तह तक जाकर जांच की और अस्पताल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज व स्टाफ के बयानों का विश्लेषण किया। जांच में पाया गया कि मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद भी चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू करने में न केवल देरी की गई, बल्कि जिम्मेदारी के निर्वहन में भारी चूक भी हुई।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस

जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही बरतने वाले निम्नलिखित कर्मियों को 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है:

  • डॉ. पंकज मिश्रा (सह-प्राध्यापक, सर्जरी विभाग)

  • डॉ. गौरव झा (सीनियर रेजिडेंट, सर्जरी विभाग)

  • डॉ. गौरव कुमार (न्यूरो सर्जरी विभाग)

  • डॉ. हरेंद्र कुमार (सर्जरी विभाग)

  • डॉ. अमन कुमार (सीनियर रेजिडेंट)

  • डॉ. रंजीत कुमार सिंह (एमएसओ, ट्रायज)

  • संजय कुमार मांझी (स्वास्थ्य प्रबंधक)

  • पुनीता जायसवाल (स्वास्थ्य प्रबंधक)

इन सभी से पूछा गया है कि घायल मरीज के अस्पताल में आने के बाद उनके द्वारा क्या कदम उठाए गए और निर्धारित प्रोटोकॉल के बावजूद इलाज समय पर क्यों नहीं शुरू हो सका?

अब आगे क्या?

सूत्रों के अनुसार, जांच समिति ने रिपोर्ट में इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। प्रशासन का कहना है कि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में इनके खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना दर्शाती है कि सरकारी अस्पतालों में ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के तुरंत बाद का समय) के महत्व को लेकर अभी भी संवेदनशीलता की कमी है। अमन की जान तो वापस नहीं आ सकती, लेकिन उसके परिजनों और समाज को अब इंसाफ का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग भी इस पूरे मामले पर अपनी नजरें जमाए हुए है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन केवल नोटिस तक सीमित रहता है या फिर दोषियों को कठोर सजा देकर एक नजीर पेश करता है।

Share This Article