बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की 8 सीटों पर चुनावी घमासान की तैयारी

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में विधायकों के माध्यम से विधान परिषद की 10 सीटों के चुनाव के बाद, अब राज्य में स्नातक (Graduate) और शिक्षक (Teacher) निर्वाचन क्षेत्र की 8 सीटों के लिए चुनावी बिगुल बजने वाला है। ये सीटें इसी साल नवंबर में खाली हो रही हैं, और इनके लिए चुनावी सरगर्मी अभी से ही चरम पर पहुंच गई है।

चुनावी गणित और चुनावी प्रक्रिया

यह चुनाव सामान्य नहीं है; इसमें केवल स्नातक डिग्रीधारी मतदाता और माध्यमिक स्तर से ऊपर के शिक्षक ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। चुनाव आयोग ने इन निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदाता सूची जारी कर दी है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (कुल 4 सीटें)

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाता (1.35 लाख) हैं, जबकि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या सबसे कम (88.11 हजार) है।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (कुल 4 सीटें)

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पटना सबसे बड़ा क्षेत्र है जहाँ 16,689 शिक्षक मतदाता हैं। कुल मिलाकर, राज्य की इन 8 सीटों पर कुल 5.30 लाख से अधिक मतदाता अपने नए प्रतिनिधि चुनेंगे।

प्रमुख सीटों पर दिलचस्प मुकाबला

इन 8 सीटों पर कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। आइए प्रमुख क्षेत्रों की स्थिति पर नजर डालते हैं:

  • पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार यहां से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि, उन्हें बागी उम्मीदवारों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: यह सीट बेहद दिलचस्प है। पिछली बार के उपचुनाव में जदयू को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार जदयू फिर से अभिषेक झा के जरिए जीत का दावा कर रही है।

  • तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: सीपीआई के संजय कुमार सिंह तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। बीजेपी ने अभी अपने उम्मीदवार का खुलासा नहीं किया है, जिससे यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं।

  • दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, जबकि जदयू के दिलीप चौधरी भी दौड़ में शामिल हैं।

 

एनडीए बनाम महागठबंधन

बिहार विधान परिषद में वर्तमान में एनडीए के पास 49 सीटें हैं, जबकि महागठबंधन 19 सीटों के साथ विपक्ष में है। एनडीए इस चुनाव में अपनी संख्या बल को और मजबूत करना चाहता है।

  • एनडीए का पक्ष: विधान परिषद के मुख्य सचेतक संजय गांधी का कहना है कि उनकी तैयारी पूरी है और एनडीए सभी 8 सीटों पर जीत हासिल करेगा।

  • महागठबंधन का पक्ष: आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद का दावा है कि शिक्षक और स्नातक वर्ग में सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। उनका तर्क है कि रोजगार और नई शिक्षा नीतियों को लेकर हुए फैसलों से यह वर्ग सरकार से असंतुष्ट है, जिसका सीधा लाभ महागठबंधन को मिलेगा।

 

सम्राट चौधरी के लिए अग्निपरीक्षा

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव केवल उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि राज्य के प्रमुख नेताओं की प्रतिष्ठा का भी है। विशेष रूप से सम्राट चौधरी के नेतृत्व के लिए यह चुनाव एक बड़ी अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। पिछले दिनों भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय चुनाव में जदयू को मिले झटके के बाद विपक्षी खेमा काफी उत्साहित है।

चुनाव आयोग की भूमिका और आगे की राह

जैसे ही चुनाव आयोग आधिकारिक तौर पर चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा, उम्मीदवारों का प्रचार अभियान और अधिक आक्रामक हो जाएगा। अभी सभी दल अपनी आंतरिक रणनीतियां बनाने और उम्मीदवारों के चयन में जुटे हैं।

बिहार विधान परिषद की ये 8 सीटें न केवल उच्च सदन के गणित को प्रभावित करेंगी, बल्कि राज्य की जमीनी राजनीति की दिशा भी तय करेंगी। स्नातक और शिक्षक वर्ग का झुकाव किस ओर होगा, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे, लेकिन फिलहाल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं।

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