BNT Desk: बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के सपनों को एक बड़ा झटका लगा है। हाल ही में आयोजित गृह रक्षा वाहिनी (होमगार्ड) अधीनस्थ लिपिक और सिपाही भर्ती परीक्षा में भारी धांधली, पेपर लीक और नकल का मामला सामने आया है। इस घटना ने राज्य में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बिहार में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की दो मुख्य घटनाएं सामने आई हैं:
-
अधीनस्थ लिपिक परीक्षा (10 जून 2026): बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप है। नवादा के एक केंद्र पर प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग की गई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
-
सिपाही भर्ती परीक्षा (14 जून 2026): इसी जिले में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा में भी बड़े पैमाने पर नकल और गड़बड़ी की खबरें सामने आई हैं। यहां परीक्षार्थियों को बाहर से हल किए गए उत्तर (चिट-पुर्जे) पहुंचाने का मामला उजागर हुआ है।
कैसे हुआ पेपर लीक?
जांच में सामने आया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। नवादा के दीक्षा पब्लिक स्कूल (केंद्र संख्या 1412) में तैनात दंडाधिकारी ने परीक्षा के दौरान कई संदिग्ध गतिविधियों को नोटिस किया था।
-
बिना पहचान पत्र के प्रवेश: परीक्षा शुरू होने से पहले एक अज्ञात व्यक्ति बिना किसी वैध आईडी कार्ड के केंद्र के अंदर घूम रहा था, जिसने खुद को केंद्राधीक्षक का सहयोगी बताया था।
-
सीसीटीवी साक्ष्य: जब आयोग ने प्रश्नपत्र वायरल होने की सूचना दी, तो सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। इसमें साफ दिखा कि परीक्षा के दौरान एक कमरे से प्रश्न पुस्तिकाएं बाहर ले जाई गईं और 10 मिनट बाद वापस रख दी गईं। इसी दौरान तस्वीरें खींचकर उन्हें वायरल किया गया।
शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी निशाने पर
इस घोटाले में केवल बाहर के लोग ही नहीं, बल्कि परीक्षा कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं।
-
आरोपी शिक्षक: केंद्राधीक्षक गणेश पासवान, शिक्षक अजय कुमार और वीक्षक अनुष्का रानी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इनमें से शिक्षक अजय कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
-
गंभीर मिलीभगत: पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं थी। केंद्राधीक्षक और वीक्षक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
नकल गिरोह का पर्दाफाश और गिरफ्तारी
सिपाही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। जांच में पता चला कि परीक्षा केंद्रों के आसपास एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो परीक्षार्थियों तक उत्तर पहुंचा रहा था।
-
मोबाइल से मिले सबूत: पुलिस ने जब आरोपियों के मोबाइल फोन खंगाले, तो उसमें परीक्षार्थियों के रोल नंबर, सेट कोड और प्रश्नों के हल की तस्वीरें मिलीं।
-
पकड़े गए मास्टरमाइंड: इस मामले में जैमर सेंटर संचालक बिपिन कुमार, बायोमेट्रिक ऑपरेटर रोहित कुमार, और कथित मास्टरमाइंड रोशन कुमार सहित कुल 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की धर-पकड़ के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है।
परीक्षा केंद्रों पर मिलीं चिट-पुर्जियां
घटनास्थल और परीक्षा केंद्रों के आसपास से फटे हुए चिट-पुर्जे बरामद किए गए हैं, जिनमें परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे। दंडाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा के दौरान कमरों में बाहर से उत्तर पहुंचाए जा रहे थे, जो सीधे तौर पर परीक्षा प्रक्रिया की विफलता को दर्शाता है।
भविष्य की राह और छात्रों की चिंता
यह घटना उन मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ा सदमा है जो कड़ी मेहनत कर इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। सरकार और पुलिस प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार किसी भी राज्य के भविष्य के लिए घातक है। बिहार पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अब उम्मीद जगी है कि इस गिरोह के मास्टरमाइंड जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक अपडेट का इंतजार करें।