BNT Desk: बिहार की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे (Patna-Purnia Expressway) परियोजना इन दिनों काफी चर्चा में है। इस परियोजना के रूट (संरेखण) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में इसके मार्ग में बदलाव किया गया है। इन दावों और बढ़ती सियासी बयानबाजी के बीच बिहार पथ निर्माण विभाग ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया है।
विभाग ने स्पष्ट कहा है कि रूट बदलने की सभी खबरें भ्रामक, निराधार और गलत हैं। आइए जानते हैं कि सरकार ने इस विवाद पर क्या कुछ कहा है।
क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि समस्तीपुर जिले में इस एक्सप्रेसवे के संरेखण (Alignment) को मनमाने ढंग से बदल दिया गया है। इन खबरों में आरोप लगाया गया था कि इसे कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए डायवर्ट किया गया है। इस विषय को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी काफी हलचल मची थी।
नहीं बदला गया है कोई रूट
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
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मूल संरेखण ही मान्य है: एक्सप्रेसवे के मार्ग में कोई भी बदलाव नहीं किया गया है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया उसी मूल स्वीकृत संरेखण के आधार पर हो रही है, जिसे जनवरी 2025 में अंतिम मंजूरी दी गई थी।
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तकनीकी स्पष्टीकरण: विभाग ने विशेष रूप से किलोमीटर 48+000 से 53+000 के बीच की स्थिति स्पष्ट की है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस पूरे हिस्से में न तो कोई विचलन हुआ है और न ही कोई संशोधन।
सरकार ने क्यों तय किया यही मार्ग?
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे का रूट किसी व्यक्ति विशेष के हित को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक आधार पर तय किया गया है। इसके लिए निम्नलिखित मानकों का पालन किया गया है:
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तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility): सड़क निर्माण के दौरान ढलान, घुमाव और सुरक्षा मानकों को सबसे ऊपर रखा गया है।
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भारतीय सड़क कांग्रेस के मानक: परियोजना का मार्ग Indian Roads Congress (IRC) के कड़े मानकों के अनुरूप है।
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विशेषज्ञों की राय: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति ने गहन समीक्षा के बाद इस मार्ग पर अपनी मुहर लगाई है।
के.एस.आर. कॉलेज और जन-हित का मुद्दा
इस विवाद के दौरान यह भी कहा जा रहा था कि के.एस.आर. कॉलेज का अस्तित्व खतरे में है। विभाग ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि:
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कॉलेज भवन सुरक्षित है: कॉलेज का मुख्य भवन पूरी तरह सुरक्षित है। अधिग्रहण की सीमा में केवल कॉलेज की कुछ खाली जमीन आ रही है।
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नुकसान को कम करने का प्रयास: सरकार का तर्क है कि यदि वे कथित ‘वैकल्पिक मार्ग’ (जो विरोधियों द्वारा सुझाया जा रहा है) को अपनाते, तो 200 से अधिक मकान और व्यावसायिक ढांचे बर्बाद हो जाते। इसके विपरीत, मौजूदा स्वीकृत संरेखण में केवल 65 ढांचे प्रभावित हो रहे हैं। यानी, मौजूदा मार्ग आम जनता के कम से कम नुकसान को सुनिश्चित करता है।
विकास के कार्य में पारदर्शिता और अपील
सरकार ने सख्त लहजे में संदेश दिया है कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इसकी प्रगति में पारदर्शिता, नियम और समयबद्धता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे इस तरह की अफवाहों और भ्रामक खबरों से सावधान रहें।
अक्सर विकास कार्यों को बाधित करने के लिए ऐसी भ्रामक सूचनाएं फैलाई जाती हैं, ताकि परियोजना में देरी हो और जनता का ध्यान मूल उद्देश्य से भटक जाए।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे बिहार की लाइफलाइन बनने जा रही है। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह साफ हो गया है कि निर्माण कार्य निर्धारित योजना के अनुसार ही चलेगा। प्रभावित होने वाले लोगों के लिए उचित मुआवजे और पुनर्वास की नीति पर भी काम किया जा रहा है। ऐसे में, किसी भी प्रकार की राजनीति या अफवाह के बजाय, परियोजना को समय पर पूरा करने पर ही प्रशासन का मुख्य ध्यान है।