पटना: ज्ञान बिंदु एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद को कोर्ट से मिली बड़ी राहत, मंजूर हुई जमानत

BiharNewsAuthor
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BNT Desk:  बिहार की राजधानी पटना के बहुचर्चित कोचिंग उद्योग से जुड़ी एक बहुत बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। मशहूर शिक्षक खान सर के कोचिंग संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ (Khan Global Studies) पर हुए कथित हमले, पथराव और तोड़फोड़ के मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए ‘ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी’ के निदेशक रौशन आनंद को सोमवार को जिला अदालत से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। लंबे समय से सलाखों के पीछे बंद रौशन आनंद की जमानत याचिका को अदालत ने मंजूर कर लिया है। इस अदालती फैसले के आते ही रौशन आनंद के समर्थकों, उनके संस्थान से जुड़े शिक्षकों और छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

निचली अदालत से झटका लगने के बाद जिला कोर्ट से मिली राहत

मामले की कानूनी प्रक्रिया की बात करें तो रौशन आनंद की जमानत याचिका पर सोमवार को एडीजे-33 (ADJ-33) की अदालत में विस्तार से सुनवाई हुई। इससे पहले उन्हें निचली अदालत यानी मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की कोर्ट से तगड़ा झटका लगा था, जहां उनकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया गया था। इसके बाद रौशन आनंद के वकीलों ने हार न मानते हुए जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की थी।

पिछली तय सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता (वादी पक्ष) के वकील ने कोर्ट से थोड़ा और समय मांगते हुए एक ‘टाइम पीटिशन’ दाखिल की थी, जिसके कारण अदालत ने मामले को सोमवार तक के लिए टाल दिया था। सोमवार को जैसे ही कोर्ट की कार्यवाही शुरू हुई, दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी जोरदार दलीलें पेश कीं। अदालत ने मामले के सभी पहलुओं और पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आखिरकार रौशन आनंद को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।

क्या था पूरा विवाद? 

यह पूरा मामला उस समय बिहार सहित पूरे देश की सुर्खियों में आ गया था, जब पटना में स्थित सोशल मीडिया के चर्चित शिक्षक खान सर के संस्थान ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ पर अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने धावा बोल दिया था। इस हमले के दौरान संस्थान पर जमकर पथराव किया गया और वहां खड़ी गाड़ियों तथा संपत्तियों में तोड़फोड़ की गई थी।

इस हिंसक घटना के तुरंत बाद खान सर के संस्थान का पूरा प्रबंधन और देखरेख करने वाले कन्हैया कुमार ने पुलिस में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज की, जिसमें ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद, उनके सगे भाई प्रिंस यादव सहित कई अन्य अज्ञात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि व्यावसायिक रंजिश या अन्य कारणों से इस हमले को सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था।

पुलिसिया कार्रवाई और छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन

एफआईआर दर्ज होने के बाद पटना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ज्ञान बिंदु संस्थान के निदेशक रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट में पेशी के बाद उन सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जिसके बाद से वे पटना की हाई-सिक्योरिटी वाली बेऊर जेल में बंद थे।

रौशन आनंद की गिरफ्तारी के बाद पटना के छात्र संघों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया। पुलिस कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए थे और उन्होंने पटना की सड़कों पर ‘कैंडल मार्च’ निकालकर रौशन आनंद के समर्थन में जमकर नारेबाजी की थी। प्रदर्शनकारी छात्रों का साफ तौर पर कहना था कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए, क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि आपसी प्रतिद्वंद्विता के चक्कर में किसी निर्दोष शिक्षक को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

मामले में नया मोड़: आरोपी भाई प्रिंस यादव की नेपाल में मौत

जब यह पूरा विवाद कानूनी दांव-पेंचों के बीच फंसा हुआ था, तभी इस केस में एक बेहद चौंकाने वाला और नया मोड़ आ गया। रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव, जो इस हमले के मामले में मुख्य नामजद आरोपियों में से एक थे और घटना के बाद से ही लगातार फरार चल रहे थे, उनकी नेपाल में मौत की खबर आई।

पुलिस लंबे समय से प्रिंस यादव की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही थी। इसी बीच सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से पता चला कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी देश नेपाल भाग गए थे और वहां के विराटनगर स्थित एक होटल में छिपकर रह रहे थे। इसी होटल के कमरे से उनकी लाश संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुई।

मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी जांच एजेंसियां

प्रिंस यादव की इस अचानक और संदिग्ध मौत ने पूरे मामले को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है। मौत की खबर आने के बाद से ही पटना से लेकर नेपाल तक कई तरह के सवाल और कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर नेपाल पुलिस और भारतीय सुरक्षा व जांच एजेंसियां आपसी तालमेल के साथ गहन जांच कर रही हैं। सुरक्षा कारणों और जांच के बाधित होने के डर से अभी तक प्रिंस यादव की मौत की कोई भी आधिकारिक या अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

खान सर के बयानों में यू-टर्न से गहराया था रहस्य

इस पूरे घटनाक्रम में एक और पहलू ऐसा था जिसने सोशल मीडिया और मुख्यधारा की मीडिया में इस विवाद को हफ्तों तक जिंदा रखा। दरअसल, घटना के शुरुआती दिनों में खुद खान सर ने मीडिया के सामने यह दावा किया था कि उनके संस्थान पर न सिर्फ पथराव हुआ है, बल्कि उपद्रवियों द्वारा गोलियां भी चलाई गई हैं।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद, खान सर ने अचानक अपने दिए गए बयान में एक बड़ा ‘यू-टर्न’ ले लिया। उन्होंने अपने नए बयान में साफ कहा कि संस्थान पर कोई गोलीबारी नहीं हुई थी, बल्कि केवल पथराव और तोड़फोड़ की गई थी। खान सर के इस बदलते बयान के कारण पूरा मामला सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बन गया था और लोग पुलिस की जांच प्रणाली पर भी सवाल उठाने लगे थे।

निष्कर्ष: अब जब जिला अदालत से रौशन आनंद को जमानत मिल चुकी है, तो इस पूरे हाई-प्रोफाइल विवाद में एक बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। हालांकि, कानूनी जानकारों का कहना है कि जमानत मिलने का मतलब केस खत्म होना नहीं है। मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है और पुलिस की तफ्तीश जारी है। अब सभी की निगाहें पुलिस की अंतिम चार्जशीट और नेपाल में हुई प्रिंस यादव की मौत की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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