BNT Desk: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस हादसे में छह मासूम और गंभीर मरीजों की जान जाने के बाद शनिवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूरे अस्पताल परिसर को सील कर दिया है।
इससे ठीक एक दिन पहले, यानी शुक्रवार को ही स्वास्थ्य विभाग के सिविल सर्जन ने अस्पताल के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द (कैंसिल) कर दिया था। सरकार और प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से इलाके के अन्य निजी अस्पतालों में भी हड़कंप मच गया है।
जांच के लिए पहुंची नगर निगम की टेक्निकल टीम
हादसे के बाद से ही प्रशासनिक अमला मुस्तैद है। शनिवार को नगर निगम की एक विशेष प्रशासनिक और तकनीकी (Technical) टीम प्रसाद हॉस्पिटल की इमारत की जांच करने पहुंची। यह टीम इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या अस्पताल का भवन सरकारी नियमों (बिल्डिंग बायलॉज) के तहत बनाया गया था या नहीं।
इसके साथ ही, अस्पताल के अंदर आग बुझाने के यंत्र (Fire Extinguishers) और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) जैसे सुरक्षा मानकों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, उनके अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों की बहुत बड़ी और गंभीर अनदेखी की थी। अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे, जिसके कारण इतना बड़ा हादसा हो गया।
सिविल सर्जन ने मांगा कड़ा जवाब, दर्ज होगी FIR?
अस्पताल की इस भारी लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन ने अस्पताल के मालिक और पूरे मैनेजमेंट (प्रबंधन) को नोटिस जारी किया है। उनसे इस लापरवाही पर कड़ा और स्पष्ट जवाब (स्पष्टीकरण) मांगा गया है कि आखिर मरीजों की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
अधिकारियों का साफ कहना है कि तकनीकी टीम की पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
कैसे हुआ था यह दर्दनाक हादसा? जानिए पूरी घटना
यह पूरी घटना गुरुवार सुबह की है, जिसने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया। मुजफ्फरपुर के इस नामचीन प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। शॉर्ट सर्किट होते ही बिजली के तारों से उठी चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया।
देखते ही देखते पूरे आईसीयू वार्ड में घना काला धुआं और आग की लपटें फैल गईं। चूंकि हादसा आईसीयू वार्ड में हुआ था, इसलिए वहां भर्ती सभी मरीज बेहद गंभीर हालत में थे। वे वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे, जिसके कारण उन्हें खुद से भागने या बाहर निकलने का जरा भी मौका नहीं मिल सका।
वार्ड में धुआं भरने के कारण मरीजों का दम घुटने लगा। इस बेहद दर्दनाक हादसे में दम घुटने और आग की चपेट में आने (झुलसने) से छह गंभीर मरीजों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल में चीख-पुकार मच गई थी और तीमारदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। अब प्रशासन इस बात को सुनिश्चित करने में जुटा है कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।