BNT Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों सरकारी आवासों के आवंटन और उन्हें खाली कराने को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। RJD द्वारा लगाए गए आरोपों और की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का करारा जवाब देने के लिए बिहार सरकार की भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह खुद मीडिया के सामने आईं।
मंत्री लेशी सिंह ने आरजेडी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीतीश सरकार कभी भी ईर्ष्या, द्वेष या बदले की भावना से कोई कार्रवाई नहीं करती है। सरकार जो भी कदम उठाती है, वह पूरी तरह से कानून के दायरे में होता है।
5 देश रत्न मार्ग और नीतीश कुमार के आवास का पूरा सच
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री लेशी सिंह ने कई प्रमुख आवासों के आवंटन को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि:
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5 देश रत्न मार्ग का सच: ‘1 अन्ने मार्ग’ (मुख्यमंत्री आवास) में अस्थाई रूप से ‘5 देश रत्न मार्ग’ को शामिल किया गया था। जब उपमुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी गृह विभाग का काम संभाल रहे थे, तो सुरक्षा और कार्य व्यवस्था के लिहाज से उस समय तुरंत उसे वहां से हटाना असंभव था।
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सुशासन का केंद्र: इसी ‘5 देश रत्न मार्ग’ वाले परिसर से विकसित बिहार, सुशासन और सूबे की कानून व्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े कार्य किए जा रहे थे, जिस पर विपक्ष केवल राजनीति के तहत लगातार आरोप लगाता रहा है।
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7 सर्कुलर रोड का अलॉटमेंट: पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘7 सर्कुलर रोड’ का आवास पूरी तरह से प्रोटोकॉल के नियमों के तहत आवंटित किया गया है। उन्हें Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, और इसी सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए बकायदा पत्र जारी कर वर्तमान आवास उन्हें आवंटित किया गया था।
“सरकारी बंगले से इतनी मोह-माया ठीक नहीं, कानून से ऊपर कोई नहीं”
भवन निर्माण मंत्री ने विपक्ष, खासकर लालू परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी आवास कभी भी किसी की निजी संपत्ति या हमेशा के लिए किसी का नहीं हो जाता है। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि नेताओं को सरकारी बंगले से ज्यादा मोह-माया नहीं रखनी चाहिए।
लेशी सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लेते हुए कहा, “कानून व्यवस्था नाम की भी कोई चीज होती है, लेकिन ऐसा लगता है कि राबड़ी देवी की नजर में कानून व्यवस्था का कोई मोल ही नहीं है। सरकार हर हाल में विधि सम्मत कार्रवाई करेगी और किसी भी स्थिति में तय नियमों के मुताबिक आवास खाली करना ही होगा।” उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि हमारी सरकार पहले की सरकारों की तरह कोई गलत धंधा तो नहीं चलाती है, जो नियमों को ताक पर रख दे।
मंत्री नंदकिशोर राम को क्यों मिला ’10 सर्कुलर रोड’?
मंत्री लेशी सिंह ने बताया कि ’10 सर्कुलर रोड’ वाला बड़ा बंगला अब मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है। उन्होंने इसके पीछे की पूरी कहानी बताते हुए आरजेडी को घेरा। लेशी सिंह ने कहा, “मंत्री नंदकिशोर राम समाज के एक बहुत गरीब तबके से आते हैं। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समाज के हर वर्ग को बराबर का अधिकार दिया है। ऐसे में एक गरीब परिवार से आने वाले मंत्री को भी बड़ा और सुंदर बंगला मिलने का पूरा अधिकार है।”
उन्होंने आगे खुलासा किया कि मंत्री नंदकिशोर राम ने स्वयं इच्छा जाहिर की थी कि उन्हें भी रहने के लिए एक बड़ा और सुंदर आवास चाहिए। वे बार-बार भवन निर्माण मंत्री के कार्यालय आकर अपने लिए आवास की डिमांड कर रहे थे। उनके इसी आग्रह और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए विभाग ने उन्हें ’10 सर्कुलर रोड’ आवंटित करने का फैसला लिया।
सिद्दीकी के सवाल पर पलटवार
इससे पहले आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था। सिद्दीकी ने सवाल उठाया था कि वर्तमान में सांसद बन चुके देवेश चंद्र ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को आखिर किस हैसियत से पटना में सरकारी आवास दिया गया है?
इस सवाल का करारा और दस्तावेजी जवाब देते हुए मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि उन दोनों नेताओं को नियम के तहत आवास अलॉट किया गया है और वे उसका बाकायदा पूरा किराया दे रहे हैं। अपनी बात को साबित करने के लिए मंत्री लेशी सिंह ने किसी कयासबाजी का सहारा नहीं लिया, बल्कि उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने दोनों नेताओं के सरकारी आवास के किराए की रसीद (Rent Receipts) को सार्वजनिक कर दिया। उन्होंने साक्ष्य दिखाते हुए स्पष्ट किया कि जिन भी मंत्रियों या सांसदों को नियमानुसार व्यवस्था दी गई है, वे पूरी तरह से पारदर्शी है।