पटना: VIP इलाके में शराबबंदी की खुली पोल! CM सम्राट चौधरी के आवास के पास मिलीं शराब की खाली बोतलें

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, जिसे अमली जामा पहनाने के लिए सूबे की पुलिस और मद्य निषेध विभाग दिन-रात मुस्तैद रहने का दावा करता है। लेकिन राजधानी पटना के सबसे सुरक्षित और हाई-प्रोफाइल माने जाने वाले वीआईपी (VIP) इलाके से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने सरकार और पुलिस प्रशासन के दावों की पूरी तरह पोल खोलकर रख दी है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘5 देशरत्न मार्ग’ स्थित सरकारी आवास से महज 100 मीटर की दूरी पर भारी संख्या में शराब की खाली बोतलें बरामद की गई हैं। इस खबर के सामने आते ही पटना के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

सचिवालय थाना पुलिस तुरंत एक्शन में

मुख्यमंत्री आवास के इतने नजदीक शराब की खाली बोतलें फेंके होने की जानकारी जैसे ही स्थानीय प्रशासन को मिली, पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे एक बड़ी लापरवाही माना गया।

सूचना प्राप्त होते ही सचिवालय थाना के थानाध्यक्ष (SHO) बिना एक पल गंवाए अपनी पूरी पुलिस टीम और सुरक्षा बलों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सबसे पहले उस पूरे इलाके की घेराबंदी की और वहां बिखरी पड़ीं शराब की सभी खाली बोतलों को तुरंत जब्त कर मौके से हटवाया, ताकि कानून व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों को शांत किया जा सके।

SHO का बयान: ‘जांच की जाएगी, किसने फेंकी बोतलें’

इस पूरे गंभीर मामले पर सचिवालय थाना के SHO ने मीडिया को संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संवेदनशील इलाके में शराब की बोतलें मिलना वाकई एक गंभीर विषय है।

थानाध्यक्ष का आश्वासन: सचिवालय SHO ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस इस मामले को हल्के में नहीं ले रही है। इस बात की गहनता से तफ्तीश की जाएगी कि आखिरकार सुरक्षा के कड़े पहरे वाले इस हाई-प्रोफाइल जोन में शराब की इतनी बोतलें किसने लाकर रखीं या फेंकी हैं। आसपास के रास्तों और सुरक्षा चौकियों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाला जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हरकत के पीछे किस असामाजिक तत्व या वीआईपी काफिले का हाथ है।

शराबबंदी कानून पर खड़े हुए गंभीर सवाल

मुख्यमंत्री आवास के आसपास का इलाका पटना का सबसे सुरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्र माना जाता है। यहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, क्योंकि हर मोड़ पर पुलिस की पिकेट, सीसीटीवी कैमरे और 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। ऐसे में इस वीआईपी जोन से शराब की बोतलें मिलना कई बड़े सवाल खड़े करता है:

  1. कैसी है यह सुरक्षा व्यवस्था? जिस जगह पर मुख्यमंत्री रहते हैं और जहां चौबीसों घंटे सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा रहता है, वहां कोई इतनी बड़ी संख्या में शराब की बोतलें लाकर कैसे फेंक सकता है? क्या सुरक्षा में कोई बड़ी चूक हुई है?

  2. शराबबंदी के दावों की हकीकत क्या है? जब पटना के सबसे सुरक्षित और अति-विशिष्ट इलाके (VVIP Area) में शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है और उसकी बोतलें सड़कों पर मिल रही हैं, तो बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों में शराबबंदी की क्या जमीनी हकीकत होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

 

विपक्ष को मिला बड़ा मुद्दा

इस घटना के बाद राजनीतिक रूप से भी माहौल गरमाने की उम्मीद है। मुख्य विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा और सीधा मौका मिल गया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में लोग चुटकी ले रहे हैं कि सरकार जिस शराबबंदी का ढिंढोरा पीटती है, उसकी हकीकत खुद मुख्यमंत्री आवास के ठीक बाहर सड़क पर बिखरी हुई नजर आ रही है।

फिलहाल, सचिवालय पुलिस इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस इलाके में देर रात तक बड़े-बड़े अधिकारियों और नेताओं की गाड़ियाँ आती-जाती रहती हैं। ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना एक बड़ी चुनौती होगा कि ये बोतलें कब और किसने यहाँ लाकर फेंकीं। आम जनता को अब पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है ताकि सच सामने आ सके।

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