BNT Desk: अगर आप आने वाले दिनों में पटना से आरा, बक्सर या यूपी की तरफ सड़क या रेल मार्ग से सफर करने वाले हैं, तो यह खबर आपके सफर को आसान बनाने में बेहद मददगार साबित होगी। बिहार के भोजपुर जिले में सोन नदी पर स्थित ऐतिहासिक कोइलवर रेल-सह-सड़क पुल (अब्दुल बारी पुल) पर दानापुर रेल मंडल की ओर से बड़े पैमाने पर मरम्मत और रेनोवेशन का काम शुरू किया गया है।
पुल की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इसके ‘अप रेललाइन’ में स्लीपर बीम बदलने का काम बेहद तेजी से कराया जा रहा है। इस बड़े मरम्मत कार्य के चलते पटना-आरा रेलखंड और उसके नीचे से गुजरने वाले सड़क मार्ग, दोनों पर अगले करीब 90 दिनों (3 महीने) तक यात्रियों और आम वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। रेलवे ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोजाना रेल और सड़क यातायात पर ब्लॉक लेने का फैसला किया है।
क्या है ब्लॉक की टाइमिंग?
रेलवे प्रशासन ने किसी भी संभावित हादसे को रोकने और काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिदिन दो तरह के ब्लॉक निर्धारित किए हैं:
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सड़क मार्ग पर ब्लॉक (3 घंटे): पुल के नीचे वाले सड़क मार्ग पर रोजाना सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक पूरी तरह से ब्लॉक लगाया जा रहा है। इस तीन घंटे के दौरान किसी भी प्रकार के छोटे या बड़े वाहन (बाइक, कार, ऑटो, बस, ट्रक) को पुल से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
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रेल मार्ग पर ब्लॉक (डेढ़ घंटे): पुल के ऊपर से गुजरने वाली रेललाइन पर भी प्रतिदिन लगभग 1.5 घंटे का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस वजह से पटना-आरा रूट पर चलने वाली कई पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के समय में बदलाव हो सकता है या उन्हें कुछ देर रोककर चलाया जा सकता है।
क्यों बदला जा रहा है स्लीपर बीम?
रेलवे के तकनीकी विंग के कर्मचारियों ने बताया कि कोईलवर पुल की अप लाइन में लगे लकड़ी और लोहे के पुराने बीम काफी जर्जर हो चुके थे। ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए इन्हें बदलना बेहद जरूरी हो गया था।
इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत पुल पर कुल 2,560 नए स्लीपर बीम लगाए जाने हैं। अब तक रेलवे ने लगभग 220 बीम बदलने का काम पूरा कर लिया है। आने वाले दिनों में इस काम की रफ्तार को और बढ़ाया जाएगा ताकि मानसून और बाढ़ के सीजन से पहले मुख्य काम को निपटाया जा सके।
सड़क मार्ग को बंद रखना क्यों है बेहद जरूरी?
पुल पर काम कर रहे रेलवे कर्मचारी सुशांत सिंह के मुताबिक, जब पुल के ऊपर (रेलवे ट्रैक पर) भारी मशीनों के जरिए काम होता है, तो नट-बोल्ट, भारी लोहे के टुकड़े या औजार नीचे सड़क मार्ग पर गिरने का बहुत बड़ा खतरा बना रहता है।
चूंकि कोईलवर पुल के नीचे से चौबीसों घंटे गाड़ियां गुजरती हैं, इसलिए नीचे वाले मार्ग को बंद रखना अनिवार्य है। अगर ब्लॉक न लिया जाए, तो ऊपर से गिरने वाला एक छोटा सा नट-बोल्ट भी नीचे गुजर रहे किसी बाइक सवार या कार चालक के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
पूर्वी छोर पर पुलिस न होने से मच रहा हंगामा
इस महाब्लॉक को लेकर रेलवे प्रशासन ने पहले ही स्थानीय जिला प्रशासन, कोईलवर थाना, बिहटा थाना और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को लिखित सूचना दे दी थी। पुल के पश्चिमी छोर (भोजपुर जिला/कोईलवर थाना क्षेत्र) पर तो बैरिकेडिंग कर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जो वाहनों को रोक रही है।
लेकिन, पुल के पूर्वी छोर (पटना जिला/बिहटा थाना क्षेत्र) पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद लचर नजर आ रही है। बिहटा के परेव इलाके की तरफ पुलिसकर्मियों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर कई ऑटो, बाइक और छोटे वाहन चालक बैरिकेडिंग को लांघकर जबरन पुल के मुहाने तक पहुंच जा रहे हैं।
यातायात का दबाव और विवाद: जब ये वाहन पुल के बीच या दूसरे छोर तक पहुंच जाते हैं, तो वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों पर रास्ता खोलने का दबाव बनाने लगते हैं। इस वजह से आए दिन पुल पर नोकझोंक और हंगामे की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बिहटा थाना और आरपीएफ (RPF) के जवानों को दोनों छोर पर मुस्तैदी से तैनात रहना चाहिए।
16 जून के बाद बढ़ेगा ब्लॉक
रेलवे विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वर्तमान में घोषित किया गया यह ब्लॉक 16 जून 2026 तक लगातार जारी रहेगा। इसके बाद काम के अगले चरण को पूरा करने के लिए रेलवे को लगभग दो महीने (60 दिन) का अतिरिक्त समय और लगेगा। कुल मिलाकर अगले तीन महीनों तक इस रूट पर यातायात प्रभावित रहेगा।
यात्रियों के लिए सलाह: रेलवे प्रशासन ने आम जनता और दैनिक यात्रियों से अपील की है कि वे सुबह 9 से 12 बजे के बीच इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा बेहद जरूरी हो, तो कोईलवर के नए फोरलेन सड़क पुल या अन्य वैकल्पिक ग्रामीण मार्गों का उपयोग करें और थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर घर से निकलें ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या जाम से बचा जा सके।