पटना: 15 साल की बच्ची से 48 घंटे तक दरिंदगी, VVIP इलाकों में घूमती रही कार और सोती रही पुलिस

BiharNewsAuthor
5 Min Read

BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना, जहाँ शासन और प्रशासन के सबसे बड़े केंद्र हैं, वहीं से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक 15 साल की नाबालिग बच्ची के साथ जो हुआ, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। मदद के नाम पर बुलाकर बंधक बनाना, 50 किलोमीटर तक कार में घुमाकर गैंगरेप करना और फिर उसे लावारिस छोड़ देना— यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी डरावनी हकीकत है। इस मामले में पुलिस ने अब तीसरे और मुख्य आरोपी को भी दबोच लिया है।

मदद का झांसा और फिर हैवानियत की शुरुआत

पीड़िता मूल रूप से मोतिहारी की रहने वाली है। घटना की शुरुआत 1 मई को पटना जंक्शन से हुई। बच्ची का मोबाइल कहीं गुम हो गया था, जिसके कारण वह परेशान थी। इसी का फायदा उठाते हुए विकास कुमार नाम के एक दरिंदे ने उसे मदद का भरोसा दिलाया। उसने बच्ची को अपनी कार में बैठाया, जहाँ उसका साथी पवन पहले से मौजूद था।

मासूम बच्ची को लगा कि ये लोग उसे घर पहुँचाने या पुलिस की मदद दिलाने में सहायता करेंगे, लेकिन उसे क्या पता था कि वह मौत से भी बदतर मंजर की ओर बढ़ रही है।

सचिवालय जैसे VVIP इलाके में 50 KM तक दौड़ती रही ‘रेप कार’

इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। आरोपियों ने बच्ची को करीब 50 किलोमीटर तक पटना की सड़कों पर घुमाया। हैरानी की बात यह है कि यह कार पटना के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सचिवालय और राजभवन जैसे हाई-प्रोफाइल इलाकों से भी गुजरी।

जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरे और पुलिस पिकेट के बावजूद किसी की नजर उस संदिग्ध कार पर नहीं पड़ी। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या वीवीआईपी इलाकों में चेकिंग सिर्फ रसूखदारों की सुरक्षा के लिए होती है? आम बेटियों की चीखें उन बंद शीशों के पार पुलिस तक क्यों नहीं पहुँचीं?

48 घंटे तक बंधक और सामूहिक दुष्कर्म

दरिंदों ने बच्ची को बेऊर थाना क्षेत्र के एक निर्माणाधीन (अधूरे बने) मकान में ले जाकर बंधक बना लिया। वहां विकास और पवन के साथ अरविंद कुमार भी शामिल हो गया। इन तीनों ने मिलकर 48 घंटों तक बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दानापुर रेल पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद अब तीसरे आरोपी अरविंद को भी गिरफ्तार कर लिया है। विकास और पवन पहले ही पकड़े जा चुके हैं।

नशीली दवाइयां और FSL की जांच

वारदात में इस्तेमाल की गई अर्टिगा कार को पुलिस ने जब्त कर लिया है। तलाशी के दौरान कार से आपत्तिजनक सामान, मोबाइल और कुछ नशीली दवाइयां बरामद हुई हैं। पुलिस को शक है कि आरोपियों ने बच्ची को नशा देकर बेसुध किया था ताकि वह शोर न मचा सके। बरामद सामानों को एफएसएल (FSL) लैब भेज दिया गया है ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।

स्पीडी ट्रायल की मांग और इंसाफ की गुहार

रेल पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए घोषणा की है कि आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाया जाएगा। पुलिस का लक्ष्य है कि चार्जशीट जल्द दाखिल हो और दरिंदों को फांसी जैसी कड़ी सजा मिले।

पीड़िता फिलहाल गहरे सदमे में है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है। मोतिहारी से आए परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बस एक ही मांग कर रहे हैं— “हमें सिर्फ इंसाफ चाहिए।”

सुरक्षा पर उठते गंभीर सवाल

यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज और सुरक्षा तंत्र की विफलता का प्रतीक है। पटना जंक्शन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके से एक बच्ची का अपहरण हो जाना और फिर शहर के बीचों-बीच उसके साथ दरिंदगी होना, यह बताता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है।

Share This Article