पटना सचिवालय: विकास भवन के शौचालय के पास मिलीं शराब की बोतलें, शराबबंदी वाले राज्य में उठे गंभीर सवाल

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है, लेकिन सोमवार को राजधानी पटना के सबसे सुरक्षित और महत्वपूर्ण इलाके ‘सचिवालय’ से आई एक खबर ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सचिवालय स्थित विकास भवन के शौचालय के ठीक बगल में कूड़ेदान (डस्टबिन) से शराब की तीन खाली बोतलें बरामद की गई हैं। यह घटना इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि इसी सचिवालय से पूरे प्रदेश की व्यवस्था और शराबबंदी कानून की निगरानी की जाती है।

शौचालय के बगल में डस्टबिन से मिलीं बोतलें

जानकारी के अनुसार, सोमवार को विकास भवन परिसर में स्थित शौचालय के ठीक बगल में रखे डस्टबिन में लोगों की नजर खाली बोतलों पर पड़ी। जब पास जाकर देखा गया, तो वे व्हिस्की की तीन खाली बोतलें थीं। जैसे ही यह खबर फैली, सचिवालय के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा और डर का माहौल बन गया। जिस जगह से ये बोतलें मिली हैं, वह काफी व्यस्त इलाका है और वहां अधिकारियों व कर्मचारियों की लगातार आवाजाही रहती है।

सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल

पटना का सचिवालय क्षेत्र ‘हाई सिक्योरिटी जोन’ माना जाता है। यहां प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति और वाहन की सघन जांच होती है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि:

  • शराब की ये तीन बोतलें इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद सचिवालय के अंदर कैसे पहुंचीं?

  • क्या सचिवालय के अंदर ही बैठकर किसी ने शराब का सेवन किया है?

  • कूड़ेदान में बोतलें मिलने का मतलब है कि सुरक्षा में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है।

शराबबंदी कानून और सरकार के दावे

बिहार सरकार लगातार दावा करती है कि राज्य में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री से लेकर तमाम आला अधिकारी समय-समय पर इसकी समीक्षा करते हैं। लेकिन सचिवालय जैसे वीआईपी परिसर से शराब की बोतलें मिलना इन दावों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सवाल सीधा है कि अगर राजधानी का मुख्य प्रशासनिक केंद्र ही सुरक्षित नहीं है, तो बाकी जिलों में कानून का क्या हाल होगा?

जांच में जुटी पुलिस और प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। इस मामले में जांच के निम्नलिखित बिंदु अहम रहने वाले हैं:

  1. CCTV फुटेज: विकास भवन और शौचालय के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि बोतलें वहां किसने फेंकीं।

  2. कर्मचारियों से पूछताछ: उस ब्लॉक में तैनात सफाईकर्मियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

  3. एंट्री रजिस्टर: सचिवालय में आने-जाने वाले बाहरी लोगों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।

 सुशासन के सामने नई चुनौती

सचिवालय के अंदर शराब की बोतलें मिलना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सुशासन की साख पर लगा एक दाग भी है। यह घटना दर्शाती है कि कानून तोड़ने वालों के मन में प्रशासन का डर कम होता जा रहा है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में दोषियों को कितनी जल्दी चिन्हित कर पाती है और सचिवालय की सुरक्षा को भविष्य में कैसे अभेद्य बनाया जाता है।

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