मधुबनी के बिजली इंजीनियर पर EOU का छापा: बिहार से नेपाल तक फैला अकूत संपत्ति का साम्राज्य, आय से 62% अधिक संपत्ति मिली; अवैध शादी के लिए नेपाल में बनवा रहा था घर
आर्थिक अपराध इकाई ने 7 ठिकानों पर एक साथ की छापेमारी, भाई के नाम फर्जी गैस एजेंसी और निजी गाड़ी सरकारी विभाग में किराए पर लगाने का भी खुलासा
पटना, 18 मार्च। बिहार के मधुबनी में तैनात बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता यानी Executive Engineer मनोज रजक के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ 7 ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में जो कुछ सामने आया, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। मनोज रजक ने सरकारी नौकरी की आड़ में बिहार से लेकर नेपाल तक अकूत संपत्ति का साम्राज्य खड़ा कर रखा था। जांच में पाया गया कि उनके पास अपनी वैध आय से 62 प्रतिशत अधिक संपत्ति है।
बिहार से नेपाल तक फैला संपत्ति का जाल
EOU की टीम ने जब मनोज रजक के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी तो सामने आई संपत्ति की फेहरिस्त देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए। एक सरकारी इंजीनियर की तनख्वाह से इतनी संपत्ति कैसे जमा हो सकती है, यह सवाल अपने आप में जवाब दे देता है। जांच में खुलासा हुआ कि मनोज रजक न केवल बिहार में बल्कि पड़ोसी देश नेपाल में भी संपत्ति बना रहे थे। कुल मिलाकर उनके पास वैध आय से 62 प्रतिशत अधिक संपत्ति पाई गई है।
अवैध शादी के लिए नेपाल में बनवा रहे थे घर
मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। जांच में पता चला कि मनोज रजक एक अपनी रिश्तेदार से अवैध विवाह करने की योजना बना रहे थे और इसके लिए नेपाल में एक घर का निर्माण करवाया जा रहा था। इस निर्माण कार्य के लिए मजदूर उनके अपने पैतृक गांव से भेजे जाते थे। यानी भ्रष्टाचार से कमाई गई रकम विदेश में भी खर्च की जा रही थी।
परिवार को भी बनाया भ्रष्टाचार का हिस्सा
जांच में यह भी सामने आया कि मनोज रजक ने भ्रष्टाचार के इस खेल में अपने परिवार को भी शामिल किया। अपने भाई संजय रजक के नाम पर फर्जी तरीके से गैस एजेंसी चलाई जा रही थी। इसके अलावा एक और बड़ा घोटाला सामने आया — मनोज ने अपनी निजी स्कॉर्पियो गाड़ी को सरकारी विभाग में किराए पर लगाकर उसका फर्जी किराया वसूला। यानी गाड़ी खुद की और किराया सरकारी खजाने से।
EOU की कार्रवाई जारी
आर्थिक अपराध इकाई ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति के सभी स्रोतों की गहन जांच की जाएगी। नेपाल में बन रही संपत्ति के बारे में भी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों की संपत्ति की नियमित जांच क्यों नहीं होती और विजिलेंस तंत्र इतने लंबे समय तक इस भ्रष्टाचार को कैसे देखता रहा।