शपथ ग्रहण के बाद हंगामा: नीतीश कुमार के सामने जेडीयू कार्यकर्ताओं का हाई-वोल्टेज ड्रामा, निशांत को सीएम बनाने की मांग पर अड़े समर्थक

BiharNewsAuthor
4 Min Read

BNT Desk: शुक्रवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद जश्न के माहौल के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। संसद भवन के बाहर ही जेडीयू कार्यकर्ताओं ने अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेता के सामने जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। जैसे ही नीतीश कुमार शपथ लेकर अपनी गाड़ी से रवाना होने लगे, समर्थकों के एक बड़े समूह ने उन्हें घेर लिया और बिहार की सत्ता को लेकर अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज कराईं।

कार्यकर्ताओं का गुस्सा इस बात को लेकर था कि नीतीश कुमार के बाद बिहार की कमान भाजपा के हाथों में जा सकती है। जेडीयू के एक धड़े के भीतर यह डर घर कर गया है कि यदि भाजपा का मुख्यमंत्री बना, तो राज्य में जेडीयू का अस्तित्व और भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

“निशांत को लाओ, बिहार बचाओ”: उत्तराधिकारी पर अड़े समर्थक

प्रदर्शनकारियों ने नीतीश कुमार के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए अपनी मांगें रखीं। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले से दुखी नहीं हैं, लेकिन वे सत्ता के हस्तांतरण के तरीके का विरोध करते हैं।

कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें:

  • निशांत कुमार: समर्थकों ने सबसे ज़ोरदार नारा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को अगला सीएम बनाने के लिए लगाया।

  • विकल्प के रूप में दिग्गज: समर्थकों ने कहा कि अगर निशांत नहीं, तो पार्टी के कद्दावर नेता संजय झा या ललन सिंह को मुख्यमंत्री की कुर्सी दी जाए।

  • भाजपा को ‘नो’: कार्यकर्ताओं का एक ही सुर था— “जेडीयू का मुख्यमंत्री ही रहेगा, भाजपा को कुर्सी नहीं देनी चाहिए।”

नीतीश के सामने ही फैसले का विरोध: “हम आपके निर्णय के खिलाफ हैं”

यह नजारा बेहद दुर्लभ था जब नीतीश कुमार के सामने उनके सबसे वफादार कार्यकर्ता उनके ही संभावित राजनीतिक समझौते का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने चिल्लाकर कहा, “साहब, आपके फैसले का हम विरोध करते हैं। बिहार की सत्ता जेडीयू के पास ही रहनी चाहिए।” कार्यकर्ताओं का मानना है कि पिछले 21 सालों की मेहनत से बनाई गई पार्टी की जमीन भाजपा के मुख्यमंत्री बनने से खिसक जाएगी। काफी समय तक संसद परिसर के बाहर गहमागहमी बनी रही और सुरक्षाकर्मियों को रास्ता साफ कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

दिल्ली में भाजपा की बैठक और 15 अप्रैल का डेडलाइन

एक तरफ जहां जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर हंगामा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगनी है।

संभावित सियासी घटनाक्रम:

  1. 13 अप्रैल: नीतीश कुमार पटना में अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक करेंगे और उसके बाद राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे।

  2. 14 अप्रैल: एनडीए विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा।

  3. 15 अप्रैल: नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

क्या दबाव में आएंगे नीतीश कुमार?

जेडीयू कार्यकर्ताओं का यह सुनियोजित प्रदर्शन नीतीश कुमार पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग चाहता है कि नीतीश कुमार अपनी विरासत किसी ‘बाहरी’ (भाजपा) को सौंपने के बजाय अपनी ही पार्टी या परिवार के किसी सदस्य को सौंपें। पहले भी कई मौकों पर जेडीयू नेताओं ने दबी जुबान में निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग की थी, लेकिन आज जिस तरह से सार्वजनिक रूप से हंगामा हुआ, उसने बिहार की सियासत में नई चिंगारी सुलगा दी है।

Share This Article