लालू परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में FIR रद्द करने की याचिका खारिज, चलेगा ट्रायल

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BNT Desk: RJD के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए कानूनी मोर्चे पर मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ (जमीन के बदले नौकरी) घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लालू यादव की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने और अपने परिवार के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि लालू यादव और इस मामले के अन्य आरोपियों को ट्रायल का सामना करना ही होगा।

शीर्ष अदालत का सख्त रुख: नहीं मिलेगी FIR से राहत

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने लालू यादव की दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि कार्यवाही को इस स्तर पर रद्द नहीं किया जा सकता। लालू यादव ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उनके खिलाफ राजनीतिक विद्वेष के कारण मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों और अब तक के साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए ट्रायल जारी रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट अब इस मामले की मेरिट के आधार पर जांच करने के लिए स्वतंत्र है।

उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर मिली ‘आंशिक राहत’

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें एक बड़ी मानवीय राहत भी दी है। अदालत ने आदेश दिया कि ट्रायल के दौरान लालू यादव को निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की आवश्यकता नहीं होगी। उनके वकील उनकी ओर से कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे। यह लालू यादव के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि वे लंबे समय से किडनी और दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ की तरह चला खेल: निचली अदालत

बता दें कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले ही इस मामले में लालू यादव, तेजस्वी यादव और मीसा भारती समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निचली अदालत ने अपनी टिप्पणी में इस पूरे घोटाले को एक ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ (आपराधिक उद्यम) करार दिया था। कोर्ट का मानना है कि रेलवे में नौकरियां देने के लिए जिस तरह से जमीनों का हस्तांतरण हुआ, वह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।

क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाला?

यह पूरा मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का आरोप है कि:

  • रेलवे के विभिन्न जोन (खासकर ग्रुप-डी) में नौकरी देने के बदले उम्मीदवारों से जमीनें ली गईं।

  • ये जमीनें बाजार दर से बेहद कम कीमत पर या उपहार के रूप में ली गई थीं।

  • सीबीआई का दावा है कि ये तमाम जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनकी शेल कंपनियों (जैसे एके इंफोसिस्टम्स) के नाम पर ट्रांसफर की गईं।

बिहार की राजनीति पर असर

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार में सत्ता परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री को लेकर पहले से ही सियासी घमासान मचा हुआ है। लालू परिवार के लिए यह कानूनी झटका आरजेडी के मनोबल पर असर डाल सकता है। विरोधी दल अब इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों को हवा देंगे। आने वाले दिनों में जब ट्रायल कोर्ट में गवाहों के बयान और साक्ष्यों की जांच तेज होगी, तो बिहार की राजनीति में भी इसकी तपिश महसूस की जाएगी।

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