पटना, बिहार। बिहार के रियल एस्टेट सेक्टर में इन दिनों एक नाम चर्चा और विवादों के केंद्र में है— Shital Buildtech Private Limited। पटना के बिहटा और नयागांव की प्राइम लोकेशंस पर ‘सपनों के घर’ का सपना दिखाकर यह कंपनी मध्यमवर्गीय परिवारों की गाढ़ी कमाई को ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रही है। हमारी विस्तृत पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की निगरानी पर भी सवाल खड़े करते हैं।
1. ‘I Love Shital Green City’: भव्य गेट के पीछे का ‘काला सच’
बिहटा की सड़कों पर “I Love Shital Green City” लिखा हुआ शानदार प्रवेश द्वार किसी को भी आकर्षित कर सकता है। एक आम आदमी अपनी जीवन भर की बचत यहाँ निवेश करता है, यह सोचकर कि वह सुरक्षित है। लेकिन जैसे ही निवेश की किश्तें पूरी होती हैं, बिल्डर का असली चेहरा सामने आता है।
पड़ताल में पता चला है कि जिन ग्राहकों ने सालों तक EMI भरी, उन्हें जमीन का कब्जा तो दूर, अब बिल्डर के ‘हथियारबंद बॉडीगार्ड्स’ की धमकियां मिल रही हैं। बाहुबली संस्कृति का यह मेल रियल एस्टेट को अपराधियों का अड्डा बना रहा है।
2. RERA का ‘विड्रॉल’ खेल: कानून की आँखों में धूल
रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA को ग्राहकों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन Shital Buildtech ने इसे ही ठगने का हथियार बना लिया।
मामला: Shital Green Vatika (आनंदपुर, बिहटा)
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प्रमोटर की चाल: कंपनी ने प्रोजेक्ट के लिए आवेदन तो किया, लेकिन जब कागजी कमियां पकड़ी जाने लगीं, तो खुद ही आवेदन वापस (Withdraw) ले लिया।
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दस्तावेज का प्रमाण: फॉर्म ‘D’ (Letter No. 761/2018/474) साफ कहता है: “You are hereby informed that your application for registration of project is rejected as withdrawn… before the Hon’ble Bench on 24.03.2022.”
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धोखाधड़ी का तरीका: बिल्डर ने मार्च 2022 में हाथ खींच लिए, लेकिन ग्राहकों को कभी यह नहीं बताया कि प्रोजेक्ट अब अवैध है। वे ‘RERA Applied’ के नाम पर पैसे वसूलते रहे।
यही हाल Shital Highway City (पूर्वी चंपारण), मुजफ्फरपुर, राजगीर और वैशाली के प्रोजेक्ट्स का है, जो सालों से “Application Under Query” की श्रेणी में लटके हुए हैं।
3. बिना नक्शा, बिना परमिशन: नियम ताक पर
“Shital Green City-II” (Application No. RERAP305201800448-7) के मामले में RERA ने 16 मार्च 2022 को सख्त रुख अपनाते हुए प्रोजेक्ट को रिजेक्ट (Rejected) कर दिया।
रिजेक्शन का मुख्य कारण: बिल्डर ने संबंधित अथॉरिटी से स्वीकृत नक्शा (Approved Map) जमा ही नहीं किया था।
बिना स्वीकृत नक्शे के प्लॉटिंग करना और उसे बेचना RERA कानून 2016 और बिहार रियल एस्टेट नियमावली 2017 के तहत एक संज्ञेय अपराध है। यह सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
4. रजिस्ट्री के नाम पर ‘फाइनेंशियल फ्रॉड’: 4.5 लाख बनाम 11 लाख
हमारी जांच में एक बड़ा ‘वित्तीय विरोधाभास’ (Discrepancy Gap) सामने आया है। प्रशांत भारद्वाज के मामले का विश्लेषण करें तो:
| विवरण | विवरण/राशि |
| रजिस्ट्री की तारीख | 06 जून 2018 |
| सरकारी रजिस्ट्री मूल्य | ₹4,51,000 |
| बिल्डर द्वारा कुल वसूली | ₹11,08,000 (25 किस्तों में) |
बड़ा सवाल: जब जमीन की रजिस्ट्री ₹4.51 लाख में हुई, तो बाकी के ₹6.57 लाख कहाँ गए? यह ब्लैक मनी को खपाने या टैक्स चोरी का एक व्यवस्थित तरीका नजर आता है।
इतना ही नहीं, बिल्डर ने ‘दाखिल-खारिज’ (Mutation) के नाम पर ग्राहकों से मूल रजिस्ट्री के कागजात भी वापस ले लिए और 4-6 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें वापस नहीं किया। बिना म्यूटेशन के वह जमीन कानूनी तौर पर खरीदार की नहीं मानी जा सकती।
5. फजल इमाम कॉम्प्लेक्स: ‘टर्चर सेल’ या ऑफिस?
पटना के फ्रेजर रोड स्थित फजल इमाम कॉम्प्लेक्स (चौथी और पांचवीं मंजिल) इस पूरे खेल का ‘कंट्रोल रूम’ है। पीड़ितों के अनुसार:
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यहाँ संदीप सिंह और अविनाश मिश्रा जैसे एजेंटों का नेटवर्क काम करता है।
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मैनेजिंग डायरेक्टर मो. यासिर इमाम अब निवेशकों से मिलते तक नहीं हैं।
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ऑफिस जाने पर हथियारबंद गार्ड्स से सामना होता है, जो ग्राहकों को डराकर भगा देते हैं।
एक पीड़ित ने व्हाट्सएप चैट के जरिए बताया कि उसने अपने भाई के साथ मिलकर 35 लाख रुपये लगाए थे, लेकिन अब न तो पैसा मिल रहा है और न ही जमीन।
6. निष्कर्ष और चेतावनी: अगला शिकार आप तो नहीं?
Shital Buildtech का यह मामला एक ‘क्लासिक फ्रॉड’ है। केवल एक भव्य गेट और मीठी बातों पर भरोसा न करें। निवेश से पहले यह जरूर जांचें:
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RERA वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का स्टेटस ‘Approved’ है या नहीं।
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क्या बिल्डर के पास सक्षम प्राधिकारी का स्वीकृत नक्शा है?
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रजिस्ट्री के तुरंत बाद दाखिल-खारिज (Mutation) की प्रक्रिया खुद पूरी करें।
परमबीर सिंह की विशेष रिपोर्ट।