BNT Desk: बिहार के सबसे छोटे जिले शिवहर की जिलाधिकारी प्रतिभा रानी शुक्रवार को एक अलग ही अंदाज में नजर आईं। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर वे चमनपुर स्थित सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुँचीं। यहाँ उन्होंने एक अधिकारी के तौर पर केवल फाइलों की जांच नहीं की, बल्कि खुद एक ‘शिक्षक’ की भूमिका निभाते हुए क्लास रूम में जाकर बच्चों को पढ़ाया।
डीएम का यह सरल और आत्मीय अंदाज देखकर बच्चे पहले तो हैरान रह गए, लेकिन जल्द ही वे डीएम साहिबा के साथ घुल-मिल गए और उनके सवालों के जवाब देने लगे।
ब्लैकबोर्ड पर परीक्षा और बच्चों की काबिलियत
जिलाधिकारी ने शिक्षा की जमीनी हकीकत परखने के लिए सीधे तौर पर छात्रों से संवाद किया। उन्होंने खुद ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल किया और बच्चों से गणित व भाषा से जुड़े सवाल पूछे। बच्चों की रीडिंग क्षमता (पढ़ने की योग्यता) को जांचने के लिए डीएम ने अंग्रेजी के कुछ स्पेलिंग और उनके अर्थ पूछे।
हैरानी और खुशी की बात यह रही कि बच्चों ने बिना झिझके और बहुत ही तेजी से (झटपट) सही-सही जवाब दिए। खास तौर पर बुनियादी कक्षाओं (कक्षा 1, 2 और 3) के छोटे बच्चों की निर्भीकता और प्रतिभा को देखकर जिलाधिकारी काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने बच्चों के सही उत्तर देने पर उनकी पीठ थपथपाई और उनका उत्साहवर्धन किया।
शिक्षकों और हेडमास्टर से सीधे सवाल
क्लास रूम में पढ़ाई का जायजा लेने के बाद डीएम प्रतिभा रानी ने स्कूल प्रबंधन पर भी अपनी नजर रखी। उन्होंने बच्चों से ही पूछा कि क्या शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आते हैं? साथ ही, हेडमास्टर से विद्यालय में नामांकित कुल बच्चों की संख्या, उनकी उपस्थिति और मिड-डे मील की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे न केवल पाठ्यक्रम पूरा करें, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दें।
पुस्तकों का वितरण और अभिभावकों से अपील
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही जिलाधिकारी ने स्कूल में नव-नामांकित बच्चों के बीच नई पाठ्य-पुस्तकों का वितरण किया। किताबें पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान डीएम ने वहां मौजूद अभिभावकों से भी बातचीत की। उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजें, क्योंकि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे वे अपने परिवार और पूरे शिवहर जिले का नाम रोशन कर सकते हैं।
लक्ष्य: शत-प्रतिशत नामांकन और घर-घर दस्तक
जिलाधिकारी ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि शिवहर में कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर न रहे। उन्होंने इसके लिए एक कार्ययोजना भी साझा की:
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घर-घर भ्रमण: टोला सेवक, तालीमी मरकज, विकास मित्र और शिक्षक घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे का स्कूल में दाखिला हो।
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आंगनवाड़ी से स्कूल तक: जो बच्चे आंगनवाड़ी में 6 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं, उनका अनिवार्य रूप से कक्षा 1 में नामांकन कराया जाए।
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निगरानी: उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि नामांकन से कोई भी बच्चा वंचित नहीं रहना चाहिए।
बदलता शिवहर: नक्सलवाद से शिक्षा के उजालों तक
शिवहर जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक बनावट और नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहता था, अब विकास की नई कहानी लिख रहा है। राज्य सरकार और वर्तमान जिला प्रशासन का पूरा फोकस शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है।
डीएम प्रतिभा रानी के इस कदम ने न केवल बच्चों में आत्मविश्वास भरा है, बल्कि शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत किया है। जिले के लोगों का कहना है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद बच्चों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनता है, तो पूरी व्यवस्था में एक सकारात्मक संदेश जाता है।