पूर्णिया: खूंटे से बांधकर प्रेमी-प्रेमिका को बेरहमी से पीटा, वार्ड सदस्य बरसाता रहा लाठियां

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार के पूर्णिया जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक वीडियो सामने आया है। कसबा प्रखंड के गुरही पंचायत में न्याय के नाम पर सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाई गई हैं। एक कथित प्रेमी जोड़े को खूंटे से बांधकर स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा बेरहमी से पीटने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो रहा है। रोंगटे खड़े कर देने वाले इस वीडियो ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोकतंत्र में किसी जनप्रतिनिधि को इस तरह की ‘तुगलकी सजा’ देने का अधिकार है?

गर्भवती महिला पर भी नहीं आया तरस: क्या है पूरा मामला?

घटना गुरही पंचायत के वार्ड नंबर 09 की है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला शादीशुदा है और वह गर्भवती भी है। बताया जा रहा है कि उसका गांव के ही एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। तीन दिन पहले दोनों को गांव की एक सुनसान जगह पर मिलते हुए देखा गया था, जिसके बाद गांव में इसकी चर्चा होने लगी।

मामला जब वार्ड सदस्य तक पहुंचा, तो न्याय करने के बजाय वहां ‘तालिबानी इंसाफ’ का मंच सजाया गया। प्रेमी और प्रेमिका दोनों को अलग-अलग खूंटों से बांध दिया गया ताकि वे हिल भी न सकें। इसके बाद स्थानीय वार्ड सदस्य ने जो किया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

लुंगी-गंजी पहनकर लाठियां बरसाता रहा वार्ड सदस्य

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लुंगी और गंजी पहने एक शख्स, जिसकी पहचान वार्ड सदस्य मो. अहमद के रूप में हुई है, ताबड़तोड़ लाठियां बरसा रहा है। वह बिना रुके महिला और युवक को पीट रहा है। हैरानी और दुख की बात यह है कि जिस वक्त यह बर्बरता हो रही थी, वहां सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। लेकिन किसी ने भी आगे बढ़कर इस जुल्म को रोकने की हिम्मत नहीं दिखाई। सभी ‘तमाशबीन’ बने रहे और कुछ लोग तो मोबाइल से इस क्रूरता का वीडियो बना रहे थे।

मुखिया प्रतिनिधि की मौजूदगी में लगा ‘तुगलकी दरबार’

स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस वक्त यह तालिबानी सजा दी जा रही थी, वहां स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि मो. सरवर भी मौजूद थे। वे कथित तौर पर ‘जज’ की भूमिका में थे और उनकी सहमति से ही इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया गया। जनप्रतिनिधियों द्वारा कानून को अपने हाथ में लेकर इस तरह का ‘कंगारू कोर्ट’ (जन अदालत) लगाना प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

पति का बयान: “दोनों ने मिलकर मारा”

पीड़ित महिला के पति मो. अब्दुल ने बताया कि उसकी पत्नी एक लड़के के साथ गलत काम करते पकड़ी गई थी। उसे पकड़कर गाँव लाया गया, जहाँ वार्ड सदस्य और मुखिया प्रतिनिधि ने मिलकर उसे और उस युवक को बुरी तरह पीटा। पति की बातों से स्पष्ट है कि गाँव के प्रभावशाली लोगों ने मिलकर इस हिंसा को ‘सामाजिक इंसाफ’ का नाम देने की कोशिश की।

पुलिस की कार्रवाई: छापेमारी जारी

घटना का वीडियो वायरल होने और पुलिस के संज्ञान में आने के बाद विभाग हरकत में आया है। कसबा थानाध्यक्ष ज्ञानरंजन ने बताया कि पीड़ितों में से एक, मो. शफीक के आवेदन पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

  • प्राथमिकी दर्ज: पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

  • गिरफ्तारी के प्रयास: वार्ड सदस्य मो. अहमद और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

  • कड़ी कार्रवाई का भरोसा: पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

समाज के लिए चिंता का विषय

21वीं सदी में इस तरह की ‘तालिबानी सजा’ सभ्य समाज पर एक बड़ा धब्बा है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और जनप्रतिनिधि ही लाठियां भांजने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? यह घटना न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे बिहार की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना के लिए एक चेतावनी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन ‘कथित न्यायाधीशों’ को कितनी जल्दी जेल के पीछे भेजता है।

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