BNT Desk: पटना में मानवता और राष्ट्रीयता को शर्मसार करने वाला एक मामला प्रकाश में आया है। अरुणाचल प्रदेश से बिहार में अपनी कला का प्रदर्शन करने आई एक डांस टीम को शहर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में नस्लीय भेदभाव (Racism) का सामना करना पड़ा। उन्हें न केवल अपमानित किया गया, बल्कि उनके भारतीय होने पर भी सवाल उठाए गए।
क्या है पूरा मामला?
घटना 2 अप्रैल की बताई जा रही है। अरुणाचल प्रदेश का एक डांस ग्रुप पटना में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में परफॉर्मेंस देने आया था। इसी दौरान टीम के सदस्य शहर के एक अस्पताल परिसर में पहुंचे। वहां मौजूद एक महिला अटेंडेंट ने उन्हें सार्वजनिक वॉशरूम का इस्तेमाल करने से रोक दिया। जब कलाकारों ने इसका कारण पूछा, तो अटेंडेंट का व्यवहार बेहद आक्रामक और अपमानजनक हो गया।
“आईडेंटिटी कार्ड दिखाओ, तब जाने देंगे”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बेज रंग (Beige) की यूनिफॉर्म पहने महिला अटेंडेंट कलाकारों को अंदर जाने से मना कर रही है। हद तो तब हो गई जब उसने कलाकारों से उनके भारतीय होने का सबूत मांगा। अटेंडेंट ने उनसे कहा कि वे अपना आईडी कार्ड (आधार कार्ड) दिखाएं, तभी उन्हें अंदर जाने की अनुमति मिलेगी।
हैरानी की बात यह है कि जब कलाकारों ने इस भेदभाव का विरोध किया, तो महिला अटेंडेंट गंभीर होने के बजाय हंसने लगी और उन पर नस्लभेदी फब्तियां कसने लगी।
‘चिंकी’, ‘मोमो’ और ‘चीनी’ कहकर उड़ाया मजाक
वीडियो में सुना जा सकता है कि महिला अटेंडेंट पूर्वोत्तर के इन कलाकारों को “चिंकी”, “मोमो” और “चीनी” कहकर चिढ़ा रही है। ग्रुप की एक महिला सदस्य ने हिम्मत दिखाते हुए इस पूरी बदसलूकी को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। वीडियो में कलाकार की भर्रायी हुई आवाज सुनी जा सकती है, जो रुआंसे मन से कह रही है:
“हम नॉर्थ-ईस्ट से यहां घूमने और परफॉर्म करने आते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं की वजह से अब हमें डर लगने लगा है। क्या हम अपने ही देश में सुरक्षित नहीं हैं?”
सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट पर आक्रोश की लहर दौड़ गई है। एक्स (ट्विटर) और फेसबुक पर हजारों लोगों ने इस घटना की निंदा की है।
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एक यूजर ने लिखा, “पूर्वोत्तर के लोग सीमा पर देश की रक्षा करते हैं, मेडल जीतते हैं, फिर भी उन्हें अपने ही देश में विदेशी क्यों समझा जाता है?”
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दूसरे यूजर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टैग करते हुए लिखा, “यह बिहार की छवि के लिए काला धब्बा है, दोषियों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री पेमा खांडू और बिहार पुलिस से मांग
इस घटना के बाद अब लोग बिहार के मुख्यमंत्री और अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू से सख्त हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और बिहार पुलिस के आला अधिकारियों से संपर्क साधा है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज होने का इंतजार है, लेकिन जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
नस्लवाद: एक गंभीर सामाजिक बुराई
यह घटना कोई पहली बार नहीं है जब पूर्वोत्तर के भाई-बहनों को इस तरह के नस्लीय हमले झेलने पड़े हों। भारत के संविधान के तहत सभी नागरिक समान हैं, चाहे वे किसी भी क्षेत्र के हों या उनका चेहरा कैसा भी दिखता हो। पटना की इस घटना ने प्रशासन की सतर्कता और आम लोगों की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।