BNT Desk: बिहार में इन दिनों कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां सूरज की तपिश लोगों को पसीने से तर-बतर कर रही है, वहीं दूसरी ओर अचानक आने वाले आंधी-तूफान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सोमवार की शुरुआत तेज धूप के साथ हुई, जिससे तापमान में भारी उछाल दर्ज किया गया। राज्य के कई हिस्सों में पारा 38°C से 40°C के बीच पहुंच गया है, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है।
मौसम का बदलता मिजाज और विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बिहार में इस समय मौसम का मिजाज बेहद अस्थिर है। अगले 24 घंटों के भीतर राज्य के बड़े हिस्से में मौसम पलटी मार सकता है। विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। चेतावनी दी गई है कि भीषण गर्मी के बाद अचानक तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की प्रबल संभावना है।
इस दौरान हवाओं का रुख काफी आक्रामक हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आंधी की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है। यह गति इतनी है कि कमजोर निर्माण, पेड़ और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा सकती है।
इन 18 जिलों पर मंडरा रहा है खतरा
मौसम विभाग ने विशेष रूप से उत्तर और पश्चिम बिहार के जिलों को सतर्क रहने की सलाह दी है। करीब 18 जिलों में भारी आंधी और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। मुख्य रूप से प्रभावित होने वाले जिले हैं:
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उत्तर बिहार: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी।
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पश्चिम बिहार: सीवान, गोपालगंज, सारण (छपरा)।
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दक्षिण और अन्य: कैमूर, बक्सर, भोजपुर, रोहतास।
इन इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के तारों के नीचे शरण न लें।
क्यों हो रहा है ऐसा? मौसम विज्ञानियों का तर्क
बिहार में मौसम के इस “शॉक ट्रीटमेंट” के पीछे तीन प्रमुख प्राकृतिक कारण बताए जा रहे हैं:
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पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): जो हिमालयी क्षेत्रों से होकर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को प्रभावित कर रहा है।
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लो प्रेशर बेल्ट (Low Pressure Belt): बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और स्थानीय स्तर पर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण बादल बन रहे हैं।
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जेट स्ट्रीम (Jet Stream): वायुमंडल की ऊपरी परतों में चलने वाली तेज हवाएं इस अस्थिरता को और बढ़ावा दे रही हैं।
इन तीनों सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने की वजह से बिहार में कभी “लू” जैसे हालात बन रहे हैं, तो कभी अचानक “तूफानी” शाम आ जा रही है।
किसानों की बढ़ी चिंता: फसलों पर भारी मार
इस बेमौसम बरसात और आंधी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। रामनवमी की रात को आए भीषण तूफान ने पहले ही काफी तबाही मचाई थी, और अब 31 मार्च को भी वैसे ही हालात बनने की आशंका है।
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गेहूं और मक्का: खेतों में गेहूं की फसल पक कर तैयार है। तेज हवाओं के कारण गेहूं और मक्का के पौधे जमीन पर बिछ गए हैं, जिससे दाने खराब होने और कटाई में दिक्कत आने का खतरा है।
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आम की फसल: बिहार के आम के बगीचों में इस बार अच्छी मंजर आई थी, लेकिन तेज आंधी ने कच्चे आमों (टिकोले) को झाड़ दिया है। इससे बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सावधानी ही बचाव है
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि दोपहर की गर्मी से बचने के लिए हाइड्रेटेड रहें और शाम को आंधी आने की स्थिति में घर से बाहर न निकलें। विशेष रूप से वज्रपात से बचने के लिए खेतों में काम कर रहे किसान मौसम खराब होते ही पक्के मकानों की शरण लें।