बिहार में भूमि सुधार का ‘मिशन मोड’: कल पटना में जुटेगा राज्यभर के DCLR का हुजूम, कामकाज की समीक्षा के साथ होगा ‘राइटिंग टेस्ट’

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BNT Desk: बिहार सरकार जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे और राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी तरह एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में 7 अप्रैल, मंगलवार को पटना स्थित पुराना सचिवालय (विभागीय मुख्यालय) में राज्य के सभी भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR) की एक दिवसीय राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई है। यह बैठक सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक चलेगी।

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का विजन: “त्वरित और पारदर्शी न्याय”

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री सह उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने इस बैठक को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा कि आम जनता को जमीन से जुड़े मामलों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

“दाखिल-खारिज, अपील वाद और लैंड बैंक जैसे कार्यों की नियमित समीक्षा से जवाबदेही तय होगी। हड़ताल के बाद चार्ज संभालने वाले नए अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि जनता का कोई भी काम बाधित न हो।” — विजय कुमार सिन्हा (उपमुख्यमंत्री)

बैठक का पहला सत्र: प्रदर्शन का होगा कड़ा आकलन

विभाग के प्रधान सचिव श्री सीके अनिल पहले सत्र की अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 (01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक) के दौरान हुए कार्यों का माहवार विश्लेषण किया जाएगा। मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर पैनी नजर रहेगी:

  • दाखिल-खारिज अपील वाद: म्यूटेशन से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे की गति।

  • BLDR और मापी अपील वाद: भूमि विवाद निराकरण और जमीन की पैमाइश से जुड़े वादों का निष्पादन।

  • अधिकारियों की जवाबदेही: पदस्थापन के बाद से अब तक संबंधित अधिकारी ने कितने केस सुलझाए, इसका सीधा आकलन किया जाएगा। सुस्त प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

राजस्व वसूली और लैंड बैंक पर विशेष फोकस

बैठक में केवल मुकदमों की ही चर्चा नहीं होगी, बल्कि सरकारी खजाने और विकास योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता पर भी बात होगी।

  1. राजस्व वसूली: राज्य में राजस्व संग्रहण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा होगी।

  2. लैंड बैंक सत्यापन: सरकारी परियोजनाओं के लिए चिन्हित भूमि का भौतिक सत्यापन कितना हुआ, इसकी रिपोर्ट जांची जाएगी।

  3. निरीक्षण रिपोर्ट: अंचल (Block) और हल्का स्तर पर अधिकारियों ने कितनी बार औचक निरीक्षण किया और वहां क्या कमियां पाई गईं, इस पर विस्तृत चर्चा होगी।

दूसरा सत्र: डीसीएलआर का ‘राइटिंग टेस्ट’ और ट्रेनिंग

बैठक का दूसरा हिस्सा काफी तकनीकी और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। अधिकारियों की न्यायिक दक्षता (Judicial Efficiency) परखने के लिए एक ‘कोर्ट केस ऑर्डर लिखने का टेस्ट’ आयोजित किया जाएगा।

  • उद्देश्य: यह देखना कि अधिकारी कानूनी रूप से कितने सटीक और स्पष्ट आदेश पारित कर रहे हैं।

  • जरूरी निर्देश: सभी DCLR को अपने साथ लैपटॉप, डोंगल और कम से कम 4 से 5 लाइव कोर्ट केस के तथ्यों के साथ आने को कहा गया है।

  • प्रशिक्षण: जरूरत के अनुसार अधिकारियों को न्यायिक ड्राफ्टिंग का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि उनके फैसलों को उच्च न्यायालयों में चुनौती देने की गुंजाइश कम रहे।

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सीधी चोट

विभाग के उप सचिव देवेश कुमार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों को अकेले ही बैठक में आना है, किसी सहायक कर्मी को साथ लाने की अनुमति नहीं है। यह कदम अधिकारियों को उनके काम के प्रति सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाने के लिए उठाया गया है। बिहार सरकार का लक्ष्य राजस्व प्रशासन को इतना प्रभावी बनाना है कि ग्रामीण स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और लापरवाही को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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