पश्चिम चंपारण: बगहा से बाढ़ के पानी के साथ गांव में पहुंचा विशाल मगरमच्छ, वन विभाग ने रेस्क्यू कर गंडक नदी में छोड़ा

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BNT Desk: पटना नहीं, बल्कि पश्चिम चंपारण के बगहा से बाढ़ के बीच मगरमच्छों के बढ़ते खतरे की खबर सामने आई है। गंडक नदी में उफान और बाढ़ के बाद अब नदी से निकलकर रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे मगरमच्छों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ के पानी के साथ मगरमच्छ आसपास के नहर, नाले, पोखर और दूसरे जलस्रोतों में पहुंच रहे हैं। इसके चलते कई गांवों में लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। ताजा मामला पश्चिम चंपारण जिले के पीपरासी इलाके के मनिया छापर गांव का है। यहां बीती देर रात अचानक एक विशाल मगरमच्छ बस्ती के बीच पहुंच गया। रात के समय मगरमच्छ को गांव के अंदर देखकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही देर में इसकी जानकारी आसपास के लोगों को हुई और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए।

 

बस्ती के बीच मगरमच्छ देखकर मची अफरा-तफरी

गांव में मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस के साथ वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। मगरमच्छ की मौजूदगी को देखते हुए टीम ने ग्रामीणों की मदद से उसे सुरक्षित पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। मगरमच्छ के रेस्क्यू होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बाद में वन विभाग की टीम उसे सुरक्षित तरीके से गंडक नदी में ले गई और वहां छोड़ दिया।

 

बाढ़ के साथ जलस्रोतों तक पहुंच रहे मगरमच्छ

बताया जा रहा है कि गंडक नदी में आई बाढ़ के कारण नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल गया है। तेज बहाव और बढ़े हुए जलस्तर के बीच मगरमच्छ नदी से निकलकर आसपास मौजूद दूसरे जलस्रोतों तक पहुंच रहे हैं। इनमें नहर, नाले, आहर, पोखर और डोभ जैसे छोटे-बड़े जलस्रोत शामिल हैं। ऐसे जलस्रोतों में पानी भरने के कारण मगरमच्छों के वहां पहुंचने की संभावना बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पीपरासी क्षेत्र के अलावा आसपास के कई इलाकों में भी मगरमच्छों के दिखाई देने की सूचना सामने आती रही है।

 

कई इलाकों में मगरमच्छ दिखने की सूचना

पीपरासी, बेलहवा, अमहट, मंगलपुर और नरवल-बोरवल समेत कई इलाकों में मगरमच्छों की मौजूदगी की सूचना मिलने की बात कही जा रही है। बाढ़ के दौरान जब नदी और आसपास के जलस्रोतों का पानी आपस में मिल जाता है, तो वन्यजीवों के एक जगह से दूसरी जगह जाने की संभावना बढ़ जाती है। ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर इन जलस्रोतों के आसपास रोजमर्रा के काम के लिए जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छों की मौजूदगी चिंता का विषय बन गई है। खासकर बाढ़ के दौरान जब पानी का फैलाव अधिक हो जाता है, तब पानी के अंदर या किनारे मौजूद वन्यजीवों को पहचानना मुश्किल हो सकता है।

 

वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग की ओर से लोगों को बाढ़ के पानी और आसपास के जलस्रोतों के नजदीक जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। ग्रामीणों से कहा जा रहा है कि अगर किसी इलाके में मगरमच्छ दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसे पकड़ने या भीड़ लगाने के बजाय तुरंत पुलिस या वन विभाग को सूचना दें। इससे रेस्क्यू टीम को सुरक्षित तरीके से कार्रवाई करने का मौका मिलेगा।

 

इंसान और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा जरूरी

बगहा और आसपास का इलाका गंडक नदी और जंगलों के कारण वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक स्थिति में वन्यजीव भी अपने सामान्य स्थानों से दूसरी जगह पहुंच सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों और वन विभाग दोनों के लिए चुनौती बढ़ जाती है। एक तरफ लोगों की सुरक्षा जरूरी है, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों को भी सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक वातावरण में वापस पहुंचाना जरूरी है। मनिया छापर गांव में वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़कर गंडक नदी में छोड़ दिया है। लेकिन गंडक नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।फिलहाल ग्रामीणों की चिंता सिर्फ बाढ़ के पानी तक सीमित नहीं है। नदी के उफान के बीच मगरमच्छों के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने की घटनाओं ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। वन विभाग की अपील है कि लोग सावधानी बरतें और किसी भी वन्यजीव के दिखाई देने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

 

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