राज्यसभा जाएंगे सीएम, पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था हुई और भी सख्त, जानें क्यों दी गई Z+ सिक्योरिटी

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद को अलविदा कहकर दिल्ली की राजनीति में नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। बिहार सरकार के गृह विभाग ने न केवल उनके इस्तीफे की प्रक्रिया की पुष्टि की है, बल्कि पद छोड़ने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और राज्यसभा का सफर

ताजा घटनाक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार ने 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने महज 29 शब्दों के अपने संक्षिप्त पत्र के साथ 20 साल पुराने सदन के रिश्ते को खत्म किया।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके तुरंत बाद, 13 अप्रैल को उनके मुख्यमंत्री पद से औपचारिक इस्तीफे की संभावना है। 14 अप्रैल के बाद बिहार में एक नई सरकार का उदय होगा, जिसमें 21 साल बाद पहली बार बीजेपी (BJP) का मुख्यमंत्री राज्य की कमान संभाल सकता है।

पद छोड़ने के बाद भी अभेद्य रहेगी सुरक्षा: मिलेगी Z+ कैटेगरी

आमतौर पर पद से हटने के बाद वीवीआईपी की सुरक्षा कम कर दी जाती है, लेकिन नीतीश कुमार के मामले में सरकार ने अपवाद स्वरूप बड़ा फैसला लिया है। गृह विभाग की अधिसूचना के अनुसार, इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार को Z+ (जेड प्लस) श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी।

बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत उन्हें इस सुरक्षा का पात्र माना गया है। विभाग का कहना है कि उनके लंबे कार्यकाल और वर्तमान राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए उच्च स्तरीय सुरक्षा कवर जारी रखना आवश्यक है।

क्या होती है Z+ सुरक्षा? समझें इसकी ताकत

Z+ सुरक्षा देश की सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। नीतीश कुमार के सुरक्षा घेरे में निम्नलिखित व्यवस्थाएं शामिल होंगी:

  • सुरक्षाकर्मी: लगभग 50 से 55 प्रशिक्षित जवानों की तैनाती।

  • NSG कमांडो: पहले घेरे में 10 से अधिक अत्याधुनिक हथियारों से लैस एनएसजी (NSG) कमांडो तैनात रहेंगे।

  • त्रिस्तरीय सुरक्षा: यह सुरक्षा घेरा तीन परतों में होता है—पहला घेरा NSG का, दूसरा विशेष सुरक्षा अधिकारियों का और तीसरा स्थानीय पुलिस व अर्धसैनिक बलों का।

  • हाई-टेक सुविधाएं: इसमें बुलेटप्रूफ गाड़ियां, एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम और काफिले के लिए रूट क्लियरेंस की सुविधा शामिल होती है।

बिहार की सियासत में 21 साल बाद ‘नया सूर्योदय’

नीतीश कुमार का जाना बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय का समापन है। 1990 से 2005 तक बिहार की सत्ता पर लालू यादव परिवार का कब्जा रहा, जिसके बाद 2005 से अब तक (एक संक्षिप्त अंतराल को छोड़कर) नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहे।

अब चर्चा है कि 14 अप्रैल के बाद बिहार को अपना नया मुख्यमंत्री मिलेगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पूरी संभावना है कि अगला सीएम बीजेपी से होगा। हालांकि, बीजेपी और जेडीयू के बीच यह मूक सहमति बनी है कि चेहरा भले ही बीजेपी का हो, लेकिन उस पर नीतीश कुमार की मुहर जरूरी होगी।

गृह विभाग का आधिकारिक आदेश

पुलिस महानिदेशक (DGP) को लिखे पत्र में गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद का त्याग कर दिल्ली का रुख करेंगे। उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए डीजी (विशेष शाखा) को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे जेड प्लस सुरक्षा के प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

दिल्ली में ‘नीतीश’, बिहार में ‘बीजेपी’

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और बिहार में बीजेपी के मुख्यमंत्री की सुगबुगाहट यह दर्शाती है कि एनडीए गठबंधन के भीतर सत्ता का संतुलन बदल रहा है। जहां नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका तलाशेंगे, वहीं बिहार में ‘विकास पुरुष’ के बाद अब नए नेतृत्व की परीक्षा होगी।

अप्रैल का यह महीना बिहार के लिए न केवल मौसम के लिहाज से गर्म रहने वाला है, बल्कि राजनीतिक पारा भी अपने चरम पर होगा।

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