BNT Desk: बिहार की राजनीति के लिए आज यानी 30 मार्च 2026, सोमवार का दिन एक ऐतिहासिक गवाह बनने जा रहा है। पिछले 20 सालों से बिहार की सत्ता के शिखर पर काबिज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपनी विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे रहे हैं। पटना के 1, अणे मार्ग (सीएम हाउस) में सुबह से ही हलचल तेज है और दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है।
यह इस्तीफा केवल एक तकनीकी औपचारिकता नहीं है, बल्कि बिहार की सत्ता के ‘नये अध्याय’ की शुरुआत माना जा रहा है।
सीएम हाउस में ही सौंपा जाएगा इस्तीफा
आमतौर पर किसी भी सदन की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए सदस्य को सदन के सभापति या अध्यक्ष के कार्यालय जाना पड़ता है। लेकिन आज की स्थिति विशेष है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद विधान परिषद नहीं जाएंगे, बल्कि विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह खुद मुख्यमंत्री आवास पहुंच रहे हैं। नीतीश कुमार अपने आवास पर ही उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगे।
कौन-कौन है सीएम हाउस के भीतर?
सुबह 9 बजे से ही मुख्यमंत्री आवास के भीतर नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथियों और जेडीयू के ‘थिंक टैंक’ कहे जाने वाले नेताओं का जमावड़ा लगा है।
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ललन सिंह (केंद्रीय मंत्री): नीतीश कुमार के सबसे पुराने और रणनीतिक सहयोगी।
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संजय कुमार झा (जदयू राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष): गठबंधन और दिल्ली की राजनीति के सूत्रधार।
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विजय कुमार चौधरी (मंत्री): नीतीश सरकार के सबसे अनुभवी चेहरों में से एक।
ये तीनों नेता मुख्यमंत्री के साथ बैठक कर रहे हैं। वहीं, वरिष्ठ मंत्री बिजेन्द्र यादव सुबह-सुबह नीतीश कुमार से मिलकर बाहर निकल चुके हैं, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अंदरूनी तौर पर इस्तीफे और आगे की रणनीति की पटकथा लिखी जा चुकी है।
क्यों दे रहे हैं नीतीश कुमार इस्तीफा?
नीतीश कुमार का यह कदम संवैधानिक मजबूरी का हिस्सा है। वे 16 मार्च 2026 को निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। नियमों के मुताबिक, संसद सदस्य चुने जाने के बाद 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल (विधान परिषद) की सीट छोड़नी पड़ती है।
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नीतीश कुमार साल 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।
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उनका वर्तमान कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन अब वे पहली बार दिल्ली यानी राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे।
बीजेपी खेमे से बड़ी खबर: नितिन नवीन का भी इस्तीफा
सिर्फ नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि बीजेपी के दिग्गज नेता और मंत्री नितिन नवीन ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। कल यानी रविवार को ही नितिन नवीन ने बिहार विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंप दिया था। संजय सरावगी ने खुद इसकी पुष्टि की है कि नितिन नवीन अब दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या मुख्यमंत्री पद से भी देंगे इस्तीफा?
सबसे बड़ा सवाल जो हर बिहारी की जुबान पर है— क्या नीतीश कुमार आज मुख्यमंत्री पद भी छोड़ देंगे? सूत्रों का कहना है कि विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार सीधे राजभवन जा सकते हैं। अगर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं, तो बिहार में NDA (जेडीयू-बीजेपी) गठबंधन के तहत नए नेतृत्व का चुनाव किया जाएगा। चर्चा है कि नीतीश कुमार केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे और बिहार की बागडोर किसी नए चेहरे को सौंपी जा सकती है।
एक युग का अंत, एक नई शुरुआत
नीतीश कुमार ने 2005 के बाद से बिहार की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। ‘सुशासन’ के नारे के साथ उन्होंने जो सफर शुरू किया था, वह आज एक बड़े पड़ाव पर पहुंच गया है। विधानसभा, लोकसभा, विधान परिषद और अब राज्यसभा— इन चारों सदनों का हिस्सा बनकर नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में अपना कद और बड़ा कर लिया है।
आज की दोपहर बिहार के लिए ‘फैसले की घड़ी’ है। राजभवन से निकलने वाला हर अपडेट बिहार की अगली सरकार की सूरत तय करेगा।