BNT Desk: बिहार की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां करीब दो दशकों से सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार अब दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं। बुधवार, 8 अप्रैल 2026 का दिन बिहार के सियासी इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज अपनी अध्यक्षता में कैबिनेट की संभावित ‘आखिरी’ बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक के साथ ही राज्य में सत्ता हस्तांतरण और नई सरकार के गठन की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी।
आज कैबिनेट की बैठक में क्या होगा खास?
आमतौर पर बिहार कैबिनेट की बैठकें मंगलवार को होती हैं, लेकिन इस बार बुधवार को बुलाई गई यह बैठक कई मायनों में असाधारण है। मुख्य सचिवालय में होने वाली इस बैठक में उपमुख्यमंत्री और सभी कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नीतीश सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम बड़े फैसले ले सकती है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान जनता से किए गए वादों और घोषित योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए कई प्रस्तावों को मंजूरी देंगे। साथ ही, बिहार के विकास के लिए ‘विज़न 2030’ की रणनीति पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है। फरवरी के बाद (लगभग दो महीने बाद) होने वाली यह पहली बैठक विदाई संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है।
दिल्ली रवानगी और राज्यसभा की शपथ
मुख्यमंत्री का आगे का कार्यक्रम भी पूरी तरह तय हो चुका है। जानकारी के अनुसार:
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9 अप्रैल: नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक करेंगे और उसी दिन दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।
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10 अप्रैल: नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण करेंगे।
उल्लेखनीय है कि राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने पहले ही बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली प्रवास के दौरान वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर बिहार के भविष्य और गठबंधन की नई रूपरेखा पर चर्चा करेंगे।
14 अप्रैल: बिहार को मिलेगा नया मुख्यमंत्री?
बिहार की सत्ता में सबसे बड़ा बदलाव अगले सप्ताह देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 13 या 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप देंगे।
इस्तीफे के तुरंत बाद, 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के विधायक दल की एक महाबैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में गठबंधन के नए नेता का चुनाव होगा। चूंकि वर्तमान विधानसभा में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में मौजूद है, इसलिए प्रबल संभावना है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भाजपा कोटे से ही होगा।
रेस में कौन-कौन से नाम हैं शामिल?
नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन चार-पांच नाम ऐसे हैं जो चर्चाओं के केंद्र में हैं:
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सम्राट चौधरी: वर्तमान उपमुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता।
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नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, जिनका बिहार की राजनीति में बड़ा कद है।
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विजय सिन्हा: अनुभवी नेता और वर्तमान उपमुख्यमंत्री।
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श्रेयसी सिंह: युवा चेहरा और विधायक, जिनका नाम भी चौंकाने वाले विकल्प के रूप में लिया जा रहा है।
हालांकि, भाजपा आलाकमान का फैसला हमेशा चौंकाने वाला होता है, इसलिए अंतिम मुहर लगने तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
नीतीश कुमार का कार्यकाल: एक नजर में
2005 से लगातार बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार के नाम कई कीर्तिमान दर्ज हैं। उनके शासनकाल में बिहार ने सड़क नेटवर्क, बिजली की उपलब्धता और महिला शिक्षा (साइकिल योजना) के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव देखे। ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाने वाले नीतीश अब राष्ट्रीय राजनीति में अपनी नई भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
बिहार अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। 14 अप्रैल को होने वाला निर्णय न केवल अगले मुख्यमंत्री का चेहरा तय करेगा, बल्कि 2025-26 के आगामी राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी निर्धारित करेगा।