BNT Desk: बिहार की सियासत में इन दिनों आराम की गुंजाइश बिल्कुल नहीं है। अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और नई सरकार के गठन की चर्चाएं ठंडी भी नहीं हुई थीं कि अब बिहार विधान परिषद (MLC) के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें विधान परिषद की उन 11 सीटों पर टिक गई हैं, जिन पर आने वाले महीनों में कड़ा मुकाबला होने वाला है।
जून 2026 का लक्ष्य: 11 सीटों का पूरा गणित
बिहार विधान परिषद की कुल 11 सीटों के लिए बिसात बिछाई जा रही है। इसमें मुख्य रूप से दो हिस्से हैं:
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9 सीटें: ये वे सीटें हैं जो जून 2026 में अपना कार्यकाल पूरा कर रही हैं और खाली होने वाली हैं।
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2 उपचुनाव सीटें: दो सीटें ऐसी हैं जो सदस्यों के इस्तीफे या अन्य कारणों से खाली हुई हैं, जिन पर उपचुनाव होना है।
इन 11 सीटों पर होने वाले चुनाव न केवल सत्ता पक्ष (NDA) बल्कि विपक्ष (महागठबंधन) के लिए भी अपनी ताकत दिखाने का बड़ा मौका है।
राज्यसभा के बाद अब ‘हाउस ऑफ एल्डर्स’ पर नजर
हाल ही में राज्यसभा की सीटों के लिए हुए नामांकन और चुनाव के बाद अब बिहार के सियासी सूरमाओं का ध्यान ‘ऊपरी सदन’ यानी विधान परिषद पर है। चूंकि नीतीश कुमार खुद परिषद की सदस्यता छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं, ऐसे में परिषद के भीतर सत्ता समीकरणों को बनाए रखना जदयू और भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। रणनीतिकारों का मानना है कि इन 11 सीटों के नतीजे तय करेंगे कि सदन में किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा।
NDA की रणनीति: एकजुटता और सामाजिक समीकरण
एनडीए (भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दल) इस चुनाव को लेकर काफी गंभीर है। सूत्रों के अनुसार:
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सीटों का बंटवारा: भाजपा और जदयू के बीच सीटों के तालमेल पर प्राथमिक चर्चा शुरू हो चुकी है।
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नीतीश फैक्टर: भले ही नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति की ओर रुख कर रहे हों, लेकिन परिषद चुनाव के उम्मीदवारों के चयन में उनकी राय सबसे महत्वपूर्ण होगी।
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जातीय समीकरण: एनडीए की कोशिश होगी कि वह अति पिछड़ा (EBC), दलित और सवर्ण वोट बैंक को साधने वाले चेहरों को मैदान में उतारे।
महागठबंधन का पलटवार: क्या सेंध लगा पाएंगे तेजस्वी?
दूसरी ओर, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और वाम दल) भी चुप नहीं बैठा है। राजद की कोशिश है कि वह इन 11 सीटों में से अधिकतम पर जीत दर्ज कर सरकार पर दबाव बनाए।
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रणनीति: महागठबंधन छोटे दलों और असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है।
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युवा चेहरे: चर्चा है कि तेजस्वी यादव इस बार कुछ नए और युवा चेहरों को परिषद भेजने की तैयारी में हैं ताकि पार्टी की छवि को और आधुनिक बनाया जा सके।
14 अप्रैल का इस्तीफा और चुनाव पर असर
जैसा कि चर्चा है कि 14 अप्रैल को नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और बिहार में नई सरकार का गठन होगा, इस बदलाव का सीधा असर MLC चुनाव की वोटिंग पर पड़ेगा। नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एनडीए इन चुनावों में उतरेगी, जो उनके लिए पहली बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगी।
सियासी सरगर्मी और जोड़-तोड़ का खेल
पटना के राजनीतिक गलियारों में अभी से ही ‘जोड़-तोड़’ की खबरें आने लगी हैं। विधान परिषद के चुनावों में अक्सर विधायकों के वोटों की जरूरत होती है, ऐसे में क्रास वोटिंग का डर भी पार्टियों को सता रहा है। सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए बैठकों का दौर शुरू कर चुके हैं।