BNT Desk: बिहार की राजनीति इस वक्त अपने सबसे बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। लंबे समय तक सूबे की सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब बिहार के ‘नाथ’ की भूमिका छोड़कर देश की संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से जो बड़ी खबर सामने आ रही है, उसने राज्य के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से लेकर उनके इस्तीफे और नई सरकार के शपथ ग्रहण तक की पूरी टाइमलाइन अब लगभग साफ हो चुकी है।
दिल्ली दौरा और राज्यसभा की शपथ (9 और 10 अप्रैल)
सियासी घटनाक्रम की शुरुआत कल शाम से होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल शाम पटना से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
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10 अप्रैल: यह दिन नीतीश कुमार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी दिन वे आधिकारिक तौर पर राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
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बीजेपी कोर कमेटी की बैठक: 10 अप्रैल को ही दिल्ली में बीजेपी कोर कमेटी की एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में बिहार के भविष्य और गठबंधन के नए स्वरूप पर गहन चर्चा होगी।
दिल्ली में तय होगा बिहार का नया ‘सरदार’
सूत्रों की मानें तो दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से होगी। इस मुलाकात को केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं माना जा रहा है। असल में, इसी बैठक में उस नाम पर अंतिम मुहर लगेगी, जो नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाएगा।
हालांकि, नाम का चयन दिल्ली में हो जाएगा, लेकिन गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसकी आधिकारिक घोषणा 13 अप्रैल के बाद ही की जाएगी। भाजपा और जदयू के बीच सत्ता के हस्तांतरण का जो फार्मूला तय हुआ है, उसे अंतिम रूप इसी दौरे में दिया जाएगा।
13 अप्रैल: कैबिनेट की विदाई बैठक
मुख्यमंत्री 12 अप्रैल को दिल्ली से वापस पटना लौटेंगे। इसके अगले दिन यानी 13 अप्रैल को नीतीश कैबिनेट की ‘अंतिम’ बैठक होने की संभावना है। यह बैठक भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह आखिरी औपचारिक बैठक हो सकती है। इस बैठक में वे अपने मंत्रियों और अधिकारियों को भविष्य के लिए निर्देश दे सकते हैं और कुछ लंबित महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दे सकते हैं।
14 अप्रैल: इस्तीफे का दिन और नई शुरुआत
बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल का दिन मील का पत्थर साबित होगा। सूत्रों के अनुसार, इसी दिन नीतीश कुमार राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही करीब दो दशक पुराने एक बड़े राजनैतिक युग का समापन हो जाएगा। इस्तीफे के तुरंत बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें नए नेता के नाम का प्रस्ताव रखा जाएगा।
15 अप्रैल: नई सरकार का सूर्योदय
अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के अनुसार रहा, तो 15 अप्रैल को बिहार में नई सरकार का गठन हो जाएगा। नए मुख्यमंत्री अपने कैबिनेट के साथ शपथ लेंगे। चूंकि भाजपा गठबंधन में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, इसलिए यह लगभग तय माना जा रहा है कि नया मुख्यमंत्री भाजपा के खेमे से ही होगा।
बिहार के लिए क्या बदल जाएगा?
नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना और बिहार में नए चेहरे का आना राज्य के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा।
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प्रशासनिक बदलाव: नए नेतृत्व के साथ प्रशासन में नई टीम और नई कार्यशैली देखने को मिलेगी।
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गठबंधन की मजबूती: भाजपा और जदयू के बीच नए सिरे से शक्ति का संतुलन बनेगा।
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2025 की तैयारी: नई सरकार का मुख्य फोकस आगामी विधानसभा चुनावों पर होगा।
फिलहाल, सबकी नजरें कल होने वाली नीतीश कुमार की दिल्ली रवानगी पर टिकी हैं। अगले एक हफ्ते के भीतर बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी, इसका सस्पेंस अब खत्म होने वाला है।