BNT, Patna: बिहार में इन दिनों राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव होना है और नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च तय है। दिलचस्प बात यह है कि अब तक किसी भी गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं किया है। 4 मार्च को होली का त्योहार है, ऐसे में माना जा रहा है कि आखिरी दिन ही सभी दल अपने पत्ते खोलेंगे।
सीटों का गणित और गठबंधन की स्थिति
बिहार विधानसभा के मौजूदा समीकरणों के अनुसार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास स्पष्ट बहुमत है। आंकड़ों के लिहाज से एनडीए आसानी से 4 सीटें जीत सकता है, जिनमें दो सीटें जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और दो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में जाने की संभावना है। हालांकि, एनडीए की नजर 5वीं सीट पर भी टिकी है।
दूसरी ओर, महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत होती है। यानी महागठबंधन अपने दम पर एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद महागठबंधन ने मुकाबले में बने रहने के लिए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है।
महागठबंधन की रणनीति
महागठबंधन की नजर अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर है। सूत्रों के अनुसार, AIMIM के 5 विधायकों और बसपा के एक विधायक का समर्थन हासिल कर संख्या 41 तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता, ऐसे में विधायकों को स्वतंत्र रूप से वोट देने की छूट होती है। यही कारण है कि इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना अधिक रहती है।
AIMIM को साथ लाने के लिए महागठबंधन की ओर से मुस्लिम चेहरे को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है। वहीं, यह भी अटकलें हैं कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा चुनाव मैदान में उतर सकते हैं, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
एनडीए की रणनीति
एनडीए भी 5वीं सीट जीतने के लिए सक्रिय है। इसके लिए उसे कम से कम 3 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में उसकी नजर विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों पर है।
सूत्रों के मुताबिक, इंडिपेंडेंट या छोटी पार्टियों के विधायकों के अलावा कांग्रेस के कुछ असंतुष्ट विधायकों और बसपा के एकमात्र विधायक पर भी एनडीए की नजर है। बसपा विधायक इस पूरे समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जिस पर दोनों गठबंधनों की नजर है।
जेडीयू के संभावित उम्मीदवार
जेडीयू के दो राज्यसभा सांसद — हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर — का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हरिवंश नारायण सिंह की वापसी मुश्किल मानी जा रही है, जबकि रामनाथ ठाकुर को लेकर असमंजस की स्थिति है।
रामनाथ ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं और वर्तमान में केंद्र में मंत्री भी हैं। सामाजिक समीकरण के लिहाज से उनका नाम महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिलता है, तो पार्टी उन्हें अन्य जिम्मेदारी दे सकती है।
इसके अलावा, जेडीयू की ओर से नए चेहरों में मनीष वर्मा, भोला शर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के नाम चर्चा में हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के नाम को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं है।
भाजपा के संभावित नाम
भाजपा की रणनीति पर हमेशा सस्पेंस बना रहता है। पिछली बार पार्टी ने चौंकाते हुए नए चेहरों को मौका दिया था। इस बार भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह का नाम चर्चा में है। इसके अलावा अन्य नामों पर भी मंथन जारी है, लेकिन पार्टी ने अभी तक कोई संकेत नहीं दिया है।
उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान का समीकरण
राजनीतिक हलकों में उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान को लेकर भी चर्चा तेज है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास सीमित विधायक हैं, जिससे उनका दोबारा राज्यसभा पहुंचना मुश्किल माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा की ओर से उन्हें पार्टी विलय का प्रस्ताव दिया गया है। इसके बदले उन्हें राज्यसभा भेजने और उनके विधायकों को सरकार में प्रतिनिधित्व देने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो एनडीए की संख्या और मजबूत हो सकती है।
वहीं, 5वीं सीट के लिए चिराग पासवान की ओर से उनकी मां रीना पासवान के नाम की भी चर्चा है। हालांकि, इस पर भी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
5वीं सीट पर टिकी नजर
पूरे चुनाव का सबसे बड़ा मुकाबला 5वीं सीट को लेकर है। एनडीए जहां सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज करना चाहता है, वहीं महागठबंधन कम से कम एक सीट जीतने की कोशिश में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीट का फैसला क्रॉस वोटिंग, राजनीतिक रणनीति और विधायकों के रुख पर निर्भर करेगा।
अंतिम फैसले का इंतजार
नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च है और उससे ठीक एक दिन पहले होली का त्योहार है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि होली के बाद ही राजनीतिक तस्वीर साफ होगी और उम्मीदवारों के नाम सामने आएंगे।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कौन सा गठबंधन आखिरी समय में बाजी मारता है और 5वीं सीट का खेल किसके पक्ष में जाता है।
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