BNT Desk: नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Summit 2026 उस समय राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गई, जब इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (Trade Deal) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की और गंभीर आरोप लगाए।
‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ के नारों से गूंजा परिसर
शुक्रवार को समिट के दौरान 15-20 कार्यकर्ताओं का एक समूह अचानक विरोध प्रदर्शन करने लगा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी टी-शर्ट उतार दीं और सफेद रंग की विशेष टी-शर्ट्स लहराईं। इन टी-शर्ट्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें छपी थीं, जिनके नीचे बड़े अक्षरों में ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ लिखा हुआ था। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भारत सरकार विदेशी ताकतों और कॉरपोरेट हितों के आगे झुक गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
भारत मंडपम में अंतरराष्ट्रीय स्तर की समिट के चलते कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। नियमतः अंदर प्रवेश के लिए आधिकारिक पास या क्यूआर कोड अनिवार्य था। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भारी सुरक्षा के बावजूद अंदर पहुंच जाना दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और यह जांच कर रही है कि प्रदर्शनकारियों ने परिसर में सेंध कैसे लगाई।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। पुलिस के अनुसार, अब तक 4 से 5 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह के अनाधिकृत प्रदर्शन और नारेबाजी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
यूथ कांग्रेस का सोशल मीडिया वार
इंडियन यूथ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर इस विरोध प्रदर्शन का वीडियो साझा करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। संगठन ने लिखा: “AI समिट के चमकदार मंच के पीछे सच दबाया नहीं जा सकता। जब देशहित से ऊपर कॉरपोरेट हित दिखें और विदेश नीति में नरमी साफ नजर आए, तब विरोध कर्तव्य बन जाता है।”
राजनीतिक निहितार्थ
विपक्ष का मानना है कि हालिया भारत-अमेरिका ट्रेड डील और ‘Pax Silica’ जैसे समझौतों में भारत के हितों के साथ समझौता किया गया है। दूसरी ओर, सरकार इसे भविष्य की तकनीक के लिए एक ऐतिहासिक कदम बता रही है। भारत मंडपम की यह घटना दर्शाती है कि विदेशी व्यापार नीतियों को लेकर देश के भीतर राजनीतिक टकराव और तेज होने वाला है।