अमेरिकी सांसद ने भारत की रणनीति को बताया शानदार – चंद्रयान से मोदी तक की तारीफ

अमेरिकी सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन की जमकर सराहना की है। उन्होंने मात्र 80 मिलियन डॉलर के कम बजट में मिली इस ऐतिहासिक सफलता पर हैरानी जताई। साथ ही, उन्होंने पीएम मोदी को एक दूरदर्शी राष्ट्रवादी नेता बताते हुए कहा कि वे हमेशा अपने देश का हित सर्वोपरि रखते हैं।

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BNT Desk: दुनियाभर में भारत के चंद्रयान-3 मिशन की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार प्रशंसा सात समंदर पार अमेरिका से आई है। अमेरिकी सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने भारत के अंतरिक्ष मिशन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत ने जो कर दिखाया, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर उतरकर न केवल इतिहास रचा, बल्कि दुनिया को यह भी सिखाया कि कम बजट में बड़ी सफलताएं कैसे हासिल की जाती हैं।

अमेरिका में इतने में एक बिल्डिंग भी नहीं बनती

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मैककॉर्मिक ने हैरान करने वाली तुलना की। उन्होंने कहा, “भारत ने मात्र 80 मिलियन डॉलर (लगभग 615 करोड़ रुपये) में अपना यान चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से पर उतार दिया। ध्यान दीजिए, मैंने 80 अरब नहीं, सिर्फ 80 मिलियन कहा है। अमेरिका में तो इतने कम पैसों में एक अच्छी सरकारी बिल्डिंग तक नहीं बन पाती।” उन्होंने इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों की काबिलियत को पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बताया।

दुनिया का ‘चौथा’ और दक्षिणी ध्रुव का ‘पहला’ देश

भारत का चंद्रयान-3 मिशन वाकई बेहद खास था। इस मिशन के जरिए भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंडिंग करने वाला दुनिया का सबसे पहला देश बन गया। हालांकि, अमेरिका, रूस और चीन पहले भी चाँद पर पहुँच चुके हैं, लेकिन दक्षिणी ध्रुव जैसी कठिन जगह पर किसी ने कदम नहीं रखा था। इसरो के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने चाँद की सतह से जो डेटा भेजा, उसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को चौंका दिया था।

पीएम मोदी की ‘राष्ट्रवादी’ सोच की तारीफ

चंद्रयान के अलावा अमेरिकी सांसद ने पीएम मोदी की लीडरशिप पर भी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि मोदी एक बेहतरीन राष्ट्रवादी नेता हैं, जो हमेशा अपने देश के हित को सबसे ऊपर रखते हैं। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अमेरिका की नाराजगी के बावजूद भारत ने अपने फायदे के लिए रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। मैककॉर्मिक के मुताबिक, मोदी जानते हैं कि उनके देश की जरूरतें क्या हैं और वह दबाव में आए बिना अपने देश के लिए सही फैसले लेते हैं।

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