BNT Desk: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। भारतीय प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि उसे दूसरों पर उंगली उठाने से पहले ‘अपने गिरेबान में झांकना’ चाहिए। यह तीखी प्रतिक्रिया तब आई जब पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करने की कोशिश की। भारत ने साफ लहजे में कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र का गला घोंटकर सेना को जिस तरह असीमित ताकत दी गई है, वह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
आखिर पाकिस्तान में क्या हुआ है?
दरअसल, पाकिस्तान में हाल ही में संविधान में 27वां संशोधन किया गया है। इस बदलाव के जरिए जनरल आसिम मुनीर को ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का नया पद देकर थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों का कंट्रोल उनके हाथ में सौंप दिया गया है। इतना ही नहीं, मुनीर का कार्यकाल भी 5 साल के लिए बढ़ा दिया गया है। भारत ने इसे एक ‘संवैधानिक तख्तापलट’ करार दिया है, जहाँ चुनी हुई सरकार के बजाय पूरी ताकत सेना के एक व्यक्ति के पास सिमट गई है।
आसिम मुनीर को मिली ‘कानून से आजादी’
भारत ने जिस बात पर सबसे ज्यादा आपत्ति जताई, वह है आसिम मुनीर को मिली कानूनी सुरक्षा। इस नए कानून के तहत मुनीर को रिटायरमेंट के बाद भी किसी भी तरह की गिरफ्तारी या कोर्ट केस से पूरी तरह छूट (आजीवन प्रतिरक्षा) दे दी गई है। भारतीय प्रतिनिधि ने सवाल किया कि कोई भी लोकतांत्रिक देश अपने सैन्य अधिकारी को कानून से ऊपर कैसे रख सकता है? भारत के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने भी इस जल्दबाजी में किए गए संशोधन पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर पाकिस्तान का झूठ बेनकाब
पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में पिछले साल मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारत की छवि बिगाड़ने की कोशिश की थी। इसके जवाब में भारतीय राजदूत ने दो-टूक कहा कि पाकिस्तान का एकमात्र एजेंडा भारत को नुकसान पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को खुला समर्थन देता है और अब वह अपने देश के हालातों से ध्यान भटकाने के लिए मनगढ़ंत कहानियां सुना रहा है। भारत ने सलाह दी कि पाकिस्तान आत्मचिंतन करे कि उसने कैसे अपने ही कानून के शासन को सेना के कदमों में डाल दिया है।