ट्रंप-जेलेंस्की की बड़ी बैठक से पहले दहला कीव: क्या रूस बिगाड़ेगा शांति की बात?

फ्लोरिडा में डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति जेलेंस्की की निर्णायक शांति बैठक से ठीक पहले रूस ने कीव पर भीषण मिसाइल हमला किया है। जहाँ एक तरफ 20 सूत्रीय शांति समझौते पर चर्चा होनी है, वहीं रूस के इस हमले ने युद्धविराम की उम्मीदों के बीच तनाव और बढ़ा दिया है।

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BNT Desk: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक तरफ जहाँ शांति की उम्मीदें जगी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा में जल्द ही एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुलाकात होने वाली है। लेकिन इस मीटिंग से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन्स से भीषण हमला कर दिया है। रात भर हुए इन हमलों ने पूरे शहर को धुएं से भर दिया और यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी रात एक्टिव रहना पड़ा।

आखिर क्यों हुआ यह हमला?

यूक्रेनी सेना ने टेलीग्राम पर जानकारी दी है कि रूस ने कीव के अलावा पूर्वोत्तर और दक्षिणी हिस्सों को भी निशाना बनाया है। जानकारों का मानना है कि यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब ट्रंप और जेलेंस्की युद्धविराम (सीजफायर) पर चर्चा करने वाले हैं। अक्सर ऐसी बैठकों से पहले रूस अपनी ताकत दिखाकर बातचीत की मेज पर अपना पलड़ा भारी करने की कोशिश करता है। हालांकि, रूस की ओर से फिलहाल इन ताजा हमलों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात का एजेंडा

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि फ्लोरिडा में होने वाली इस मीटिंग का सबसे मुख्य मुद्दा यह होगा कि युद्ध रुकने के बाद कौन सा इलाका किसके कब्जे में रहेगा। 2022 से चल रहा यह युद्ध अब निर्णायक मोड़ पर है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुलाकात को लेकर काफी सकारात्मक संकेत दिए हैं। पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं क्योंकि इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।

सीजफायर में कहाँ फंसा है पेंच?

शांति के प्रयासों की बात करें तो खबर है कि 20 सूत्रीय प्रस्ताव पर 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। लेकिन सबसे बड़ी अड़चन ‘क्षेत्रीय नियंत्रण’ यानी जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। दोनों ही देश अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। जहाँ एक तरफ युद्ध के मैदान में लड़ाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे शांति के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि ट्रंप की मध्यस्थता क्या इस खूनी जंग को खत्म कर पाती है या नहीं।

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