BNT Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने डेनमार्क के इलाके ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी है, जिससे उनके अपने पुराने दोस्त यानी यूरोपीय देश भी उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% एक्स्ट्रा ‘इंपोर्ट टैक्स’ (आयात शुल्क) लगाने की बात कही है। इसके जवाब में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दो टूक कहा है कि अगर अमेरिका ऐसा कोई कदम उठाता है, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और कड़ा जवाबी एक्शन लेंगे।
मैक्रों का तीखा हमला: ‘पैरों तले रौंदे जा रहे हैं कानून’
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की इस ‘दबंग राजनीति’ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय कानूनों को पैरों तले रौंदा जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे दुनिया अब उसी की मर्जी से चलेगी जो सबसे ज्यादा ताकतवर है। मैक्रों का मानना है कि ट्रंप जानबूझकर यूरोप को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कर दिया कि बिना आपसी सहयोग के दुनिया में मुकाबला इतना कड़ा हो जाएगा कि उसे संभालना मुश्किल होगा। बेवजह के टैक्स (टैरिफ) किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
सिर्फ ट्रंप ही नहीं, पुतिन को भी सुनाई खरी-खरी
मैक्रों ने सिर्फ ट्रंप को ही नहीं घेरा, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पुतिन भी अपना साम्राज्य फैलाना चाहते हैं, जो दुनिया की शांति के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2024 में ही दुनिया भर में करीब 60 छोटी-बड़ी जंग हुईं, जिनमें से बहुत कम खत्म हो पाई हैं। मैक्रों ने चेतावनी दी कि यूरोप किसी के आगे नहीं झुकेगा। अगर अमेरिका या कोई और देश खेल के नियमों को तोड़ेगा, तो यूरोप भी अपनी सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की दलील और डेनमार्क का जवाब
आखिर ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा क्यों चाहते हैं? ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कंट्रोल नहीं किया, तो रूस और चीन वहां कब्जा जमा लेंगे, जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। हालांकि, ग्रीनलैंड के पीएम जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कोई मजाक नहीं हैं जिसे जब चाहे तोड़ दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ट्रंप की ऐसी ही मनमानी जारी रही, तो देशों के बीच बने पुराने गठबंधन टूट जाएंगे और पूरी दुनिया के लिए यह बहुत बुरा दौर होगा।