गाजा में शांति के लिए ट्रंप का बड़ा दांव: पाकिस्तान समेत 8 मुस्लिम देशों के साथ होगी 'बोर्ड ऑफ पीस' की महाबैठक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 19 फरवरी को वॉशिंगटन में 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। इसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की समेत 8 मुस्लिम देशों को बुलाया गया है। बैठक का मुख्य मकसद गाजा में शांति स्थापित करना और वहां के पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाना है।

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BNT Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में जारी जंग को रोकने और वहां फिर से विकास शुरू करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने इसके लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया है, जिसकी पहली महत्वपूर्ण बैठक 19 फरवरी 2026 को वॉशिंगटन के ‘यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ में होने वाली है। इस ऐतिहासिक समिट में पाकिस्तान समेत कुल 8 मुस्लिम देशों को न्योता दिया गया है, जो इजरायल और फिलिस्तीन के मुद्दे पर मिलकर चर्चा करेंगे।

पाकिस्तान और तुर्की की एंट्री से इजरायल हैरान

इस बैठक की सबसे चौंकाने वाली बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भागीदारी है। खबरों के मुताबिक, इजरायल शुरू से ही पाकिस्तान को ऐसे किसी भी शांति मिशन में शामिल करने के खिलाफ रहा है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत पहल पर शहबाज शरीफ 18 फरवरी को ही वॉशिंगटन पहुंच जाएंगे। इसके साथ ही तुर्की भी इस बोर्ड का हिस्सा है, जो खुलकर इजरायल की नीतियों का विरोध करता रहा है। इन देशों की मौजूदगी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की चिंता बढ़ा दी है।

बैठक में कौन-कौन से देश होंगे शामिल?

शांति की इस मेज पर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई प्रभावशाली मुस्लिम देश एक साथ नजर आएंगे। इनमें सऊदी अरब, मिस्र (Egypt), जॉर्डन, इंडोनेशिया, कतर और यूएई (UAE) शामिल हैं। ट्रंप ने कुल 22 देशों को इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए बुलाया है। इजरायल को डर है कि ये सभी मुस्लिम देश एकजुट होकर उस पर युद्धविराम (सीजफायर) की कड़ी शर्तें थोप सकते हैं और गाजा में सैन्य कार्रवाई पर लगाम लगाने की गारंटी मांग सकते हैं।

भारत ने बनाई दूरी, फ्रांस भी पीछे हटा

दिलचस्प बात यह है कि जहां कई देश इस नई पहल का हिस्सा बन रहे हैं, वहीं भारत ने फिलहाल ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपनाई है। भारत की ओर से अभी तक इस बैठक में शामिल होने की कोई पुष्टि नहीं की गई है। माना जा रहा है कि भारत ऐसे किसी मंच का हिस्सा नहीं बनना चाहता जिसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के तौर पर देखा जाए। फ्रांस जैसे अमेरिका के करीबी दोस्त ने भी फिलहाल इस बैठक से दूरी बना रखी है। अब पूरी दुनिया की नजरें 19 फरवरी पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप का यह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा में वाकई शांति ला पाएगा।

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